Friday, November 20, 2020

असिंचित-सिंचित गेहूं के साथ मसूर का रकबा भी लंबे समय बाद बढ़ाया, क्षेत्र में 95 प्रतिशत रबी सीजन की बाेवनी हुई

ब्लाॅक के 188 गांवाें में 63160 हेक्टेयर रकबा भूमि पर रबी सीजन की बाेवनी का लक्ष्य कृषि विभाग ने तय किया था, जिसमें अब तक 60370 हेक्टेयर रकबे में बाेवनी पूरी हाे चुकी है। करीब 95 प्रतिशत बाेवनी हाे गई है। पिछले साल रबी सीजन में लक्ष्य से ज्यादा 63190 हेक्टेयर रकबे पर बाेवनी हुई थी। इस साल अभी किसान नमी वाले खेताें में बाद में बाेवनी करेंगे, जिससे बाेवनी का रकबा बढ़ने की उम्मीद है। इस साल लक्ष्य के अनुरूप गेहूं का रकबा बढ़ने की उम्मीद है। किसानाें ने लंबे समय के बाद मसूर के रकबे काे भी बढ़ाया है।

चना बाेवनी का लक्ष्य 14000 हेक्टेयर का है लेकिन बोया 18200 हेक्टेयर में

किसानाें ने सिंचित एवं असिंचित गेहूं की बाेवनी की है। पिछले साल गेहूं बाेवनी का लक्ष्य 35000 हेक्टेयर था, जिसमें बाेवनी सिंचित-असिंचित गेहूं का रकबा 33710 हेक्टेयर हाे पाया था। इस साल यह लक्ष्य 41000 हेक्टेयर रकबे का है जिसमें अभी 27200 हेक्टेयर में बाेवनी हाे पाई है। किसानाें ने 18700 हेक्टेयर में सिंचित गेहूं एवं 8500 हेक्टेयर में असिंचित गेहूं की बाेवनी की है।

जिसमें शरबती गेहूं की बाेवनी कुछ कम है, किसानाें ने शरबती जैसी दिखने वाली किस्म 1544 की बाेवनी ज्यादा की है। इसका उत्पादन शरबती से दाेगुना माना जाता है। किसानाें ने इस साल जाै भी बाेवनी की है, यह 114 हेक्टेयर में बाेई गई है। इस बार दाम अच्छे मिलने से चना, मसूर की फसल की बाेवनी लक्ष्य से ज्यादा हुई है, इनके लक्ष्य पिछले साल की तुलना में कम कर दिए गए थे।

किसान चना, मसूर में उगरा, तुषार जैसी समस्याओं के कारण गेहूं की बाेवनी ज्यादा भराेसा जता रहे थे। इस बार फिर चना, मसूर की बाेवनी ठीक हुई है। चना बाेवनी का लक्ष्य 14000 हेक्टेयर का है, जिसमें लक्ष्य से ज्यादा 18200 हेक्टेयर में चने की बाेवनी की गई है। पिछले साल लक्ष्य 22000 हेक्टेयर का था, लेकिन बाेवनी 20500 हेक्टेयर में हुई थी।

इसी तरह मसून बाेवनी का लक्ष्य 7000 हेक्टेयर है, बाेवनी लक्ष्य से ज्यादा 11758 हेक्टेयर में की गई है। पिछले साल 4800 हेक्टेयर लक्ष्य था और बाेवनी 5700 हेक्टेयर में हुई थी। मटर का लक्ष्य रकबा 1000 हेक्टेयर है, बाेवनी 2500 हेक्टेयर में हाे चुकी है। तेवड़ा की बाेवनी का लक्ष्य इस बार शून्य कर दिया गया है, लेकिन किसानाें ने 367 हेक्टेयर में बाेवनी की है।

गन्ना बाेवनी का लक्ष्य रकबा शून्य है, लेकिन 8 हेक्टेयर में बाेवनी हुई है। अलसी का लक्ष्य रकबा 50 हेक्टेयर है, 28 हेक्टेयर में बाेवनी हुई है। सरसाें का लक्ष्य रकबा 100 हेक्टेयर है, बाेवनी 125 हेक्टेयर में हुई है। किसान विकास कुमार, मनाेज कुमार बताते हैं कि गेहूं की बाेवनी ज्यादा की है।

इसमें परेशानी कम हाेती है, सिंचित किस्म ज्यादा बाेई गई है। जिसमें उत्पादन ज्यादा हाेता है। गेहूं के लिए यूरिया की आवश्यकता हाेती है, किसान सिंचाई के साथ यूरिया की टाॅप ड्रेसिंग करते हैं, जिससे यूरिया की डिमांड ज्यादा है, लेकिन यूरिया मिल भी रहा है।

चना, मसूर की फसल में दाम ज्यादा मिलते हैं, लेकिन उत्पादन कम हाेता है, जिससे काेई फायदा नहीं हाेता है। लेकिन इस साल चना, मसूर के दामाें में तेजी आई है, जिससे मसूर का रकबा कई सालाें बाद बढ़ाया है। सुरक्षित फसल गेहूं पर ज्यादा किसान भराेसा जता रहे हैं।

गेहूं ज्यादा बोया है, चना, मसूर भी लक्ष्य से ज्यादा हैं

किसानाें ने इस साल भी गेहूं की फसल ज्यादा बाेवनी की है। इसमें सिंचित, असिंचित किस्म की कई वैराइटियाें का प्रयाेग किसानाें ने किया है। इसका कारण राेग कम लगना, उत्पादन अच्छा हाेना और आसानी से बिकवाली हाेना है।

पानी का साधन हाेने से अधिकतर किसानाें ने सिंचित गेहूं की किस्माें का प्रयाेग किया है। चना, मसूर की बाेवनी भी लक्ष्य से ज्यादा हुई है, दामाें में तेजी से किसानाें ने बाेवनी की है। पिछले सालाें में कम बाेवनी हाेने से चना, मसूर का लक्ष्य रकबा घट गया था।

-एसपी भारद्वाज, एसएडीओ



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source https://www.bhaskar.com/local/mp/sagar/khurai/news/the-area-of-lentils-with-unirrigated-irrigated-wheat-also-increased-after-a-long-time-the-area-is-95-percent-rabi-season-127932780.html

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