शहर की सीमाओं से कोरोना संक्रमित आ रहे हैं। यहां सबसे अधिक सुरक्षा की जरूरत है, लेकिन सबसे ज्यादा लापरवाही यहीं बरती जा रही है। हालात यह है कि यहां सीमाओं पर तैनात एमबीबीएस के इंटर्न छात्र, जो हर आने-जाने वाले का बारीकी से परीक्षण कर रहे थे, उन्हें हटा दिया गया है। इसकी सूचना प्रशासन की तरफ से जीआरएमसी प्रबंधन तक को नहीं दी गई है। पिछले सात दिन से यह डॉक्टर हटा दिए गए हैं। इन्हें हटाने के पीछे कारण कुछ छात्रों का बीमार होना बताया जा रहा है। लेकिन करीब 20 दिन तक यहां सेवा देने वाले एमबीबीएस इंटर्न छात्रों का कहना है कि प्रशासन की ओर से 8 हजार रुपए हर महीने स्टायपेंड देने की बात कही गई थी, जब यह मांग फिर की गई तो छुट्टी दे दी गई। लापरवाही यह है कि इन्हें हटा तो दिया लेकिन इनकी जगह डॉक्टरों की तैनाती शहर की सीमाओं पर नहीं की गई।
इस पूरी अव्यवस्था से हालात बिगड़ रहे हैं। यहां बाहर से आने वाले लोगों की जांच हेल्थ वर्कर के भरोसे छोड़ रखी है। यह हेल्थ वर्कर इंफ्रारेड थर्मामीटर से शरीर का तापमान तक नहीं ले रहे हैं। यह लापरवाही पूरे शहर पर भारी पड़ सकती है। क्योंकि हाल ही में दो कोरोना संक्रमित शहर की सीमा से ही दाखिल हुए थे। इनकी जांच में कहीं न कहीं चूक हो गई, इसके चलते यह शहर में आ गए। शहर में आने के बाद इनके कोरोना संक्रमित होने का पता लगा।
टीकला: यहां से प्रतिदिन गुजरते हैं औसतन 1500 वाहन
मुंबई, इंदौर, भोपाल, गुजरात, राजस्थान, उप्र से आने वाले लोग इस रास्ते से शहर में प्रवेश करते हैं। यहां से प्रतिदिन औसतन 1500 वाहन गुजर रहे हैं। इसमें मालयान भी शामिल हैं।
स्थिति: शुक्रवार दोपहर यहां मोहना थाना प्रभारी पप्पू यादव और उनकी टीम तैनात थी। स्वास्थ्य विभाग के दो कर्मचारी थे। यहां दूसरे शहर से आने वालों को पुलिसकर्मी रोक रहे थे। मालयान की जांच के लिए वॉच टावर भी लगा था। कोई डॉक्टर यहां तैनात नहीं था। स्वास्थ्य कर्मचारी न तो इनका तापमान ले रहे थे, न कोई हिस्ट्री पूछ रहे थे। पुलिसकर्मी ही पूछताछ करने के बाद इन्हें सेंट एंथोनी स्कूल भिजवा रहे थे। शुक्रवार शाम तक 25 लोगों को यहां से क्वारेंटाइन कराया गया।
लक्ष्मणगढ़: मुरैना-भिंड वाले यहीं से आते हैं
मुरैना के जरिये छोटे गांव के रास्ते यहां से लोग घुस आते हैं। भिंड से आने वाले वाहन भी इसी रास्ते से शहर में आ रहे हैं। यहां से औसतन प्रतिदिन 800 वाहन गुजर रहे हैं।
स्थिति: यहां भी डॉक्टर की टीम तैनात नहीं थी। स्वास्थ्य कर्मी ही यहां टैंट लगाकर बैठे थे। इसके अलावा प्रशासन की तरफ से पटवारी और महाराजपुरा थाने का फोर्स तैनात था। हालांकि यहां से किसी को भी प्रवेश नहीं दिया गया, यहां से लोगों को लौटा दिया गया।
निरावली: नाम, पता और बाहर से आने का कारण पूछा और रजिस्टर में हो गई एंट्री
{दिल्ली, आगरा, पंजाब, जम्मू, राजस्थान और उत्तर प्रदेश से आने वाले मालयान व अन्य लोग इसी पॉइंट से निकलते हैं।
स्थिति: शुक्रवार दोपहर में यहां दैनिक भास्कर टीम पहुंची। यहां एमपीडब्ल्यू भारत सिंह राठौर व अन्य दो स्वास्थ्यकर्मी टेंट के नीचे कुर्सी पर बैठे थे। दो पुलिसकर्मी थे, जो बेरिकेड के पास माल यान काे निकालकर निजी वाहनों को रुकवाकर इसमें मौजूद लोगों को पटवारी व एमपीडब्ल्यू के पास ले जा रहे थे। एमपीडब्ल्यू इनकी इंफ्रारेड थर्मामीटर से जांच तक नहीं कर रहे थे। सिर्फ नाम, पता और बाहर से आने का कारण पूछा फिर रजिस्टर में एंट्री की। जब उनसे दैनिक भास्कर टीम ने बात की तो बोले कि तापमान उन्हीं का लेते हैं जो संदिग्ध दिखते हैं। संदिग्ध कैसे दिखते हैं, इसके बारे में जब पूछा तो कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। फिर बोले जितने भी लोग बाहर से आते हैं, उन्हें क्वारेंटाइन करा दिया जाता है। यहां न तो बाहर से आने वालों के लिए कोई सैंपलिंग बूथ था न कोई डॉक्टर यहां तैनात था।
शहर की सीमाओं पर सैंपलिंग हो तो टल सकता है खतरा
शहर की सीमाओं पर ही डॉक्टर की टीम तैनात करने के साथ सैंपल कलेक्टिंग बूथ लगवा दिए जाएं। बाहर से आने वाले हर व्यक्ति की सैंपलिंग जरूरी है। क्योंकि कई लोग ऐसे भी हैं, जिन्हें लक्षण नहीं थे और कोरोना संक्रमित निकले। अगर यहीं सैंपलिंग करा दी जाए तो खतरा टल सकता है।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/gwalior/news/doctors-should-be-removed-from-the-city-limits-now-they-are-not-even-taking-the-body-temperature-depending-on-the-health-worker-127235067.html
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