Monday, April 20, 2020

परंपरा न टूटे इसलिए श्रीरामराजा सरकार के बीड़े के लिए चंदेरा से आया पान

(रामेश्वर दुबे).पर्यटन नगरी का श्री रामराजा मंदिर सदियों से विश्व भर में अपनी विशेष प्राचीन परम्पराओं के लिए विख्यात है। कोरोना महामारी के चलते पूरे देश में हुए लाॅकडाउन के दौरान श्री रामराजा मंदिर में भी 17 मार्च 2020 से दर्शनार्थियों का प्रवेश बन्द कर दिया गया, लेकिन इस दौरान राम दरबार की प्राचीन परंपराओं को बरकरार रखने के लिए प्रशासन पूरी शिद्दत से लगा है। ओरछा में श्रीराम एक राजा के रूप में पूजे जाते हैं, और यहां उन्हीं की सत्ता चलती है। इसीलिए सरकार के राजाशाही दरबार में बाल भोग, राज भोग और व्यारी प्रसाद के साथ इत्र काड़ी के अलावा पान बीड़ा का भोग लगाने की पुरानी परंपरा है।
लाॅकडाउन के दौरान जिले के सीमाएं सील होने पर सरकार के दरबार में बीड़ा के लिए मंदिर व्यवस्थापक, तहसीलदार रोहित वर्मा और पुलिस प्रशासन ने पड़ोसी जिला टीकमगढ़ के चंदेरा से पान बुलवाए। मंदिर के सहायक पुजारी पंडित विजय भंडारी ने बताया कि श्रीरामराजा सरकार के बीड़ा के लिए पान हमेशा झांसी से आते रहे हैं, लेकिन कोरोना के चलते सीमा सील होने की वजह से मंदिर प्रबंधन द्वारा चंदेरा से पान लाए गए। उन्होंन बताया कि पान का भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व है। यही कारण है कि जन्म से लेकर हर पारंपरिक संस्कारों के साथ पूजा में भी इसका उपयोग किया जाता है।
तहसीलदार रोहित वर्मा ने बताया कि श्री रामराजा मंदिर में पूजा परंपरागत तरीके से पूरे विधिविधान से रोज की तरह पुजारियों द्वारा चार बार पुलिस के गार्ड ऑफ आनर के साथ की जा रही है। सुबह बाल भोग आरती, दोपहर राज भोग आरती और शाम 8 बजे संध्या व रात 10.30 बजे शयन आरती के बाद सरकार शयन करते हैं। मंदिर की पूजा में कोई फेर बदल नहीं किया गया है।

भारतीय संस्कृति में पान खाना संपन्नता का प्रतीक
पान को संस्कृत में तांबूल या तमालपत्र भी कहा जाता है। पूजा में इसका विशेष महत्व है। पूजा शुरू होने से पहले मुख, मुंह, शुद्धि के पहले इसे पुजारी या भक्त खाते है। पूजा के बाद इसे भगवान को भी भोग के रूप में अर्पित किया जाता है। वैष्णव मंदिरों में इसे बीड़ा लगा हुआ पान कहा जाता है। पुराण में उल्लेख है कि पान के पत्ते में सभी देवी देवताओं का वास होता है। यहीं नहीं इसे नकारात्मक ऊर्जा को दूर तथा सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने वाला भी माना जाता है। भारतीय संस्कृति में पान खाना संपन्नता का प्रतीक माना गया है।



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Tradition did not break, so the Pan came from Chandera for the beehive of the Shri Ramaraja government


source https://www.bhaskar.com/local/mp/sagar/orchha/news/tradition-did-not-break-so-the-pan-came-from-chandera-for-the-beehive-of-the-shri-ramaraja-government-127208044.html

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