जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर का 2619वां दो दिवसीय जन्म कल्याणक महोत्सव रविवार को प्रारंभ हुआ। जन्म कल्याणक महोत्सव पर जैन समाज के लोगों ने छतों, बालकनी और दरवाजों पर दीपक जलाकर भगवान महावीर स्वामी की आराधना की। मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज ने जैन समाज के लोगों से कहा है कि वे जन्म कल्याणक महोत्सव के दौरान सोशल डिस्टेंशन का पालन करें।
महोत्सव के दौरान महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक के पूर्व संध्या पर रविवार रात 9 बजे जैन समाज के लोगों ने अपने-अपने घर के दरवाजे, बालकनी में दीपक और मोमबत्तियां जलाईं और महावीर स्वामी की आरती उतारी। भगवान महावीर स्वामी का जन्मोत्सव बड़े धूमधाम के साथ मनाया। शाम के समय लोगों ने बधाई गीत गाए और णमोकार मंत्र का जाप भी किया।
महावीर ने महामारी से निपटने के लिए ध्यान को बनाया था मेडिसिन
भगवान महावीर के समय भी महामारी का प्रकोप था। उनके द्वारा बताया गया उपाय आज भी कारगर है। दरअसल महामारी के दो प्रकार हैं। एक शारीरिक, जो शरीर को सताती है। शरीर पर आक्रमण करती है और दूसरी है इच्छाओं, कामनाओं, वासनाओं की। जिसका प्रकोप मन पर होता है। मतलब बाहरी व आंतरिक। बाहर की महामारी से बचने के लिए औषधि, वैद्य, डॉक्टर आदि उपचार हैं। कोरोना महामारी का प्रकोप चीन से शुरू हुआ है। जब भी कोई विषैला प्रयोग करता है तो हवाएं प्रदूषित होती हंै और वह विषैली हवाएं रोग का रूप ले लेती हैं। उस रोग से बचने के लिए डॉक्टर कहता है मास्क लगाओ, स्वयं और घर को स्वच्छ रखो, व्यक्तियों-वस्तुओं से दूर रहो, स्पर्श मत करो। सांप को छेड़ोगे तो डसता है, बिच्छू को छुओ तो डंक मरता है, गधे की पूंछ पकड़ो तो लात मारता है, इसमें दोष किसका है? यह आपको सोचना है। आज छूने वाले का दोष है, देखने वाले का नहीं। रोकथाम के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ी सूझ-बूझ के साथ निर्देश दिए हैं। अगर लॉकडाउन की बात उठी तो एक ही कारण था कि दूषित हवाएं घरों में ना आ पाएं और दूषित पदार्थ से आप बचें, पर आपने उस सुरक्षा नियम को हृदय से ग्रहण नहीं किया। आपने उसे चुनौती और पाबंदी समझ लिया। लोगों को लगा कि सरकार ने हमें चुनौती दी है। आपका अहंकार जाग गया, आप समझ नहीं सके कि आपको क्यों रोका, संभाला जा रहा है। भगवान महावीर के समय भी महामारी का प्रकोप आया था। देश,समाज के प्रमुख लोग उनके पास पहुंच गए। उन्होंने विनय-प्रार्थना की और अपना दर्द अभिव्यक्त किया। महावीर ने सुना और कुछ बोले नहीं, अपनी ध्यान साधना में लीन हो गए। कुछ समय पश्चात महावीर ध्यान से उठे और उनकी विशेष सभा उनके नगर में पहुंच गई। प्रभु महावीर के विशेष संबोधन से ज्ञात हुआ कि ध्यान की गहराई में उतर जाओ। ध्यान की गहराई में मृत्यु पास नहीं आती। ध्यान करो। महामारी से मुक्त हो जाओगे। लोगों ने वैसा ही किया और महामारी से मुक्त हो गए। मेडिटेशन से मेडिसिन का अाविष्कार हुआ है। ध्यान एक प्रकार की मेडिसिन ही है।
आदमी नींद में सब कुछ भूल जाता है। उसे यह भी पता नहीं कि मैं हिंदू हूं या मुसलमान, जैन हूं या बौद्ध, अनपढ़ हूं या शिक्षित, विद्वान हूं या मूर्ख, मैं बच्चा हूं या युवक, जवान हूं या बूढ़ा, कुछ पता नहीं चलता मैं कौन हूं। इसी प्रकार जब ध्यान में व्यक्ति उतरता है अपने से मिलता है। बुराई और रोग को भूल जाता है। देह से संबंध छूटता है तो विदेही की यात्रा शुरू हो जाती है। विदेशी नहीं, विदेही बनो। आदमी के मेडिटेशन में उतरने के बाद शरीर अपने आप मेडिसिन को प्राप्त हो जाता है। मेडिटेशन मेडिसिन का काम करता है। महावीर ने भौतिक उपाय, उपचार, दवाई नहीं, आध्यात्मिक उपाय, उपचार दिया और उनकी साधना से महामारी अपने आप जड़ से समाप्त हो गई। हमने कोरोना महामारी को पकड़ लिया। टीवी, मोबाइल से चिपक गए, मनोरंजन में उतर गए, बच्चे कार्टून में मस्त हो गए। घर की मर्यादाएं टूट गईं। देह की अर्थी तो नहीं, संस्कारों की अर्थी सज गई।
अंतरंग और बहिरंग बीमारियों को मात देने के लिए सात्विक विचार और व्यवहार ही उपाय हैं। बीमारी के भय ने जो आपको अवसर दिया है उस समय का सदुपयोग कीजिए। बच्चों के साथ बैठें, उन्हें संस्कार दें, जीवन का लक्ष्य पूछें व बताएं, उनके लक्ष्य को प्राप्त करने के उपाय सुझाएं। कोरोना ने व्यक्ति को परिवार से जुड़ने का अवसर दिया है। महावीर महामारी से बचने का उपाय हंै। महामारी को मात दो और स्वयं महावीर बन जाओ यही इस महावीर जयंती का संदेश है।
-जैसा कि राजेश रावत और कुलदीप जाजू को बताया।
जीवन की सबसे अनमोल वस्तु चरित्र है: मुनिश्री विहर्ष सागर
ग्वालियर| जीवन की अनमोल वस्तु चरित्र है। आचरण अमूल्य है। भगवान महावीर, श्रीराम आदि सभी आचरण से ही इस मुकाम पर पहुंचे हैं। आचरण के बिना मोक्ष संभव नहीं है। व्यक्ति जन्म से नहीं आचरण से महान व परमात्मा बनता है। अहिंसा सबकी अपनी है, दया और करुणा दूसरों की है। हम किसी जीव को हानि नहीं पहुंचाते हैं, यह हमारा अपना है। हमें दया और करुणा के लिए दूसरे व्यक्ति की आवश्यकता होती है। इसलिए हमें अपने विचारों में मजबूती लाते हुए अहिंसा की भावना को अपनाना चाहिए। यही भगवान महावीर संदेश था। धन्य है यहां के वह व्यक्ति जो जन्मभूमि में रहते हैं। यह बात राष्ट्रसंत मुनिश्री विहर्ष सागर ने रविवार को तानसेन नगर स्थित न्यू काॅलोनी में धर्मसभा में कही। इस अवसर पर मुनिश्री विजयेश सागर भी मौजूद थे।
मुनिश्री ने कहा कि राग-द्वेष से मुक्ति के लिए नव मनुष्य को भगवान के चरणों में जाना चाहिए। भगवान के चरण पूज्यनीय हैं और उनके चरण पखारने पर ही मंजिल की प्राप्ति होगी। प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में आचरण को महत्व देकर उसे समझना होगा। शब्दों से नहीं आचरण से ही धर्म और ज्ञान की प्राप्ति होती है।
प्रत्येक व्यक्ति करेगा 24 लोगों की सहायता
महावीर जयंती पर प्रत्येक व्यक्ति 24 लोगों की सहायता करेगा। राजेश जैन लाला मित्र मंडल की ओर से 3100 भोजन के पैकेट तैयार किए जाएंगे। यह भोजन जरूरतमंदों को वितरित किया जाएगा। जैन समाज के लोग जीव रक्षा के लिए गौशालाओं में पहुंचकर दान करेंगे। इसके अलावा सड़क पर घूमने वाले पशु और पक्षियों को भी दाना खिलाएंगे।
पुष्पदंत सागरजी
पुष्पगिरि तीर्थ, सोनकच्छ (मप्र) में विराजमान
केवल मंदिर में पुजारी करेंगे अभिषेक
जैन समाज के 85 जैन मदिरों में केवल पुजारी ही भगवान महावीर स्वामी का अभिषेक कर पूजा-अर्चना करेंगे। मंदिर में किसी अन्य व्यक्ति को प्रवेश नहीं दिया जाएगा।
सुबह घरों में बजेंगे वाद्ययंत्र, पालने में झूलेंगे महावीर स्वामी
सोमवार सुबह 5 बजे जैन समाज के लोग घरों के द्वार पर रंगोली सजाकर दीपक लगाएंगे। पूजा के दौरान पुरुष सफेद और महिलाएं केसरिया परिधानों में रहेंगी। सुबह 8 बजे से घरों की छत, बालकनी में पहुंच कर घंटा, थाली, ताली और वाद्ययंत्र के साथ महावीर स्वामी के जयकारे लगाए जाएंगे। सुबह 9 बजे घर में एक चौकी पर भगवान महावीर स्वामी की तस्वीर रखेंगेे। रंगोली सजाने के साथ मंगल कलश स्थापित करेंगे। इसके बाद दीप प्रज्वलित कर महावीर अष्टक और चालीसा का पाठ करेंगे। आसपास के लोगों काे लड्डू वितरण करेंगे। शाम 6.45 से 7 बजे तक बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग अपने घरों में भगवान के पालने में झुलाएंगे और घर के बाहर दीपक जलाकर भक्तामर का पाठ करेंगे।
महावीर जयंती पर संत पुष्पदंत सागर जी को पढ़िए
न्यू काॅलोनी
धर्मसभा में चर्चा करते हुए मुनिश्री विहर्ष सागर।
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source https://www.bhaskar.com/mp/gwalior/news/mp-news-jain-society-lit-a-lamp-aarti-on-the-eve-of-mahavir-swami-jayanti-070626-6978288.html
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