कोराेना संक्रमण काल में लोगों के काम का स्वरूप बदल गया है। हालांकि बदले स्वरूप का यह काम उन्हें केवल घर खर्च चलाने और समय काटने के लिए ठीक लग रहा है। इसलिए परिवार के पालन पोषण के लिए ये लोग जान जोखिम में डालकर सब्जी और फल का ठेला लगा रहे हैं। लॉकडाउन में फूल विक्रेता, निर्माण ठेकेदार, मिस्त्री, दो पहिया वाहनों के मैकेनिक, बैंडबाजा वाले मजदूर और श्रमिक वर्ग के लोग इन दिनों सब्जी और फल का ठेला लगा रहे हैं।
20 के बाद भी लॉकडाउन में ढील नहीं दी जाएगी
शहर के लोगों को यह चिंता भी सता रही है कि लॉकडाउन में कब तक ऐसे ही दिन गुजरने वाले हैं। शहर में कोरोना संक्रमण कम नहीं हो रहा है। आए दिन कोई न कोई पॉजिटिव मरीज निकल रहा है। ऐसे में हालात बदतर होते जा रहे हैं। 31 मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव होने से उज्जैन शहर भी रेडजोन में शामिल हो गया है, जिसके कारण यह तय है कि 20 अप्रैल के बाद भी लॉकडाउन में ढील नहीं दी जाएगी।
फूल विक्रेता ने शुरू किया लहसुन और प्याज बेचना
महाकाल घाटी के समीप रहने वाला सन्नी उर्फ गोपाल गायकवाड़ महाकाल के बाहर फूल विक्रेता है। लॉकडाउन के कुछ दिन बाद तक वो घर में रहा लेकिन घर में राशन और पैसे खत्म हो गए। बच्चों की भूख देख नहीं सके तो पडोस के एक व्यक्ति से ठेला उधार लिया और 500 रुपए दोस्त से उधार लेकर प्याज-लहसुन खरीद ली। इससे कुछ मुनाफा और घर खर्च चलने लगा। अब 15 दिनों से सन्नी लहसुन-प्याज बेचकर परिवार चला रहा है।
निर्माण ठेकेदार ने लगाया आलू-प्याज का ठेला
खंदार मोहल्ले में रहने वाले मकान निर्माण के ठेकेदार अब्दुल रऊफ और मिस्त्री शोएब आलू-प्याज का ठेला लगा रहे हैं। रऊफ ने बताया उसके साथ 5 मिस्त्री और 10 मजदूर काम करते हैं। जो भी राशि थी वो मिस्त्री और मजदूरों को दे दी। अब घर खर्च में परेशानी होने लगी। इसलिए ठेला किराए पर लेकर मंडी से आलू-प्याज खरीदे और इसे बेचकर परिवार का खर्च पूरा कर रहे हैं।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/ujjain/news/people-who-used-to-design-houses-and-repair-vehicles-are-now-selling-vegetables-and-fruits-to-run-the-house-127202109.html
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