Saturday, March 7, 2020

मां के साथ मजदूरी कर पढ़ाई की, बनी मेघनगर थाना प्रभारी एक झाबुआ पीजी में तो दूसरी राणापुर कॉलेज में है प्रोफेसर


ग्राम पंचायत पड़ियाल की बेटियां यहां के युवाअाें से कम नहीं है। 6 हजार की अाबादी वाले गांव की आदिवासी समाज की तीन बेटियों ने विपरीत परिस्थितियों में संघर्ष कर पढ़ाई पूरी की। अाज एक थाना प्रभारी अाैर दाे प्राेफेसर के पद पर पदस्थ हाेकर सेवा दे रही हैं। गांव की कौशल्या बामनिया झाबुअा जिले के मेघनगर में थाना प्रभारी है। वे बताती है कि प्रारंभिक शिक्षा पड़ियाल के सरकारी स्कूल में 1999 में हुई। इंदौर के जीडीसी कॉलेज में कर ग्रेजुएशन पूरा किया। साल 2005 में सब इंस्पेक्टर में चयन हुआ। 2007 में सागर में ट्रेनिंग हुईं। प्रथम पोस्टिंग ग्वालियर में हुई। 9 साल इंदौर में काम किया। 3 साल तक झाबुआ के कल्याणपूरा, काकनवानी, रायपुरिया थाना प्रभारी रही। कौशल्या गरीब परिवार में पली बड़ी है। बचपन में पिता गंभीरसिंह का निधन हो गया था। मां केशरबाई के साथ खेताें में मजदूरी कर पढ़ाई की।

धामनोद : पति के घर से चले जाने के बाद संभाला घर

धामनोद| नगर की रेवाबाई ने 20 साल पहले अपने पति के अचानक घर से चले जाने के बाद विकट परिस्थिति में घर चलाकर उनके दो बेटाें काे काबिल बनाया। उस समय बेटाें की उम्र 8 एवं 6 वर्ष की थी। एक बेटा केबल संचालक जबकि दूसरा प्राइवेट जॉब कर रहा है। इस बीच रेवाबाई ने सिलाई की, फल फ्रूट की दुकान लगाते हुए खेताें में मजदूरी भी की। खुद खेती कर फसल बोने से लेकर काटने का काम अच्छे से करती है। 45 वर्ष की उम्र में भी एक क्विंटल तक का बोझ अपने सिर पर रख बाजार में हाट करती है।

रिंगनोद : बेटाें के मना करने पर पुश्तैनी काम नहीं छाेड़ा

रिंगनोद| गांव की अन्नपूर्णा बाई ने पति मन्नालाल अहेरिया की माैत के बाद कपड़े धोने व प्रेस करने का पेशा संभाला है। दो लड़के व दो लड़कियाें की शादी भी की। लड़के बाहर एक शासकीय सेवा में है तो दूसरा व्यापार करता है। बेटाें के मना करने के बाद भी अन्नपूर्णा बाई कपड़े धोने व प्रेस करने का पुश्तैनी काम नहीं छाेड़ती। इनके पास 150 वर्ष पुरानी पीतल की 10 किलो वजनी प्रेस है। जो कोयला भरकर चलाई जाती है। कपड़े धोने के दाैरान कई ग्राहकों के कपड़ाें की जेब में कीमती सामान, रुपए, व महत्वपूर्ण कागज निकलने पर ग्राहकों काे ईमानदारी से लाैटा देती है। वर्तमान में नाती-पोतों को भी अपने पास रखकर पढ़ाई करवा रही है।

काैशल्या बामनिया

डाॅ. अंजना अलावा

बेटे का भी फर्ज निभाया, तीन बहनाें काे भी पढ़ाया

गांव की ही डॉ. बसंती अलावा का हाल ही में झाबुआ जिले के राणापुर के सरकारी कॉलेज में प्रोफेसर के पद पर चयन हुअा है। इनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव के स्कूल में हुई। घर में कोई बेटा नहीं होने से बचपन से ही जिम्मेदारी उठाई। 25 साल की उम्र तक मजदूरी के साथ पढ़ाई की। माता-पिता और तीन बहनों के साथ अपनी पढ़ाई और घर का खर्चा उठाया। 20 साल तक डही के कन्या हायर सेकंडरी स्कूल में शिक्षक के रूप में सेवा दी। बसंती के पिता किशन का निधन हाेने पर अर्थी उठा कर मुखाग्नि भी दी। उन्होंने शादी नहीं की है। प्रो. अलावा का कहना है तीनों बहनों की शादियां भी कराईं।

8 साल की उम्र में नहीं रहे पिता, मां ने कराई पढ़ाई

डॉ. अंजना अलावा पीजी काॅलेज झाबुअा में प्राेफेसर है। अलावा की प्रारंभिक शिक्षा ग्राम के प्राइमरी स्कूल में हुई। इसके बाद एमएससी वनस्पति शास्त्र तक शिक्षा प्राप्त की। 2000 से लेकर 2005 तक झाबुआ की स्नातक कॉलेज में सहायक प्राध्यापक के पद पर लेक्चर थी। साल 2017 में पीएचडी की डिग्री कर पीजी कॉलेज झाबुआ में प्रोफेसर बनी। अलावा ने बताया 8 साल की उम्र में पिता किशाेर सिंह का निधन हाे गया था। मां जुगलबाई गांव की आंबा कार्यकर्ता हाेकर पढ़ाई पूरी कराई। डॉ. अंजना के पति डॉ. राजेंद्र पाल अलावा भी पड़ियाल के हैं। जाे झाबुआ में पुलिस विभाग में हैं।

डाॅ. बसंती अलावा



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Dhamnod News - mp news studied with her mother worked in meghanagar police station one in jhabua pg and the other is professor in ranapur college
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source https://www.bhaskar.com/mp/dhar/news/mp-news-studied-with-her-mother-worked-in-meghanagar-police-station-one-in-jhabua-pg-and-the-other-is-professor-in-ranapur-college-070531-6802080.html

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