दसवीं की परीक्षा मंगलवार से संस्कृत के पेपर से शुरू हुई। जिले के 130 केंद्रों में 24 हजार 420 परीक्षार्थी परीक्षा देने पहुंचे। इनमें से एक छात्र था सिद्धांत, जो जन्म से ही हाथ-पैरों से दिव्यांग है।
पढ़ने की ललक के कारण उसने दसवीं की प्राइवेट परीक्षा का फार्म भरा था। पिता रविंद्र बाजपेयी उसे गोद में बैठकर परीक्षा दिलाने लेकर अाए, मंडल की विशेष अनुमति से दिव्यांग की राइटर 9वीं की छात्रा तनु बनी। दिव्यांग ने ढाई घंटे तक पर्चा हल करने जवाब बाेले अाैर छात्रा ने लिखे। सिद्धांत की शुरू से ही पढ़ने की रुचि थी, लेकिन शरीर के साथ ना देने के बावजूद भी लगातार पढ़ाई की। शहर के प्राइवेट स्कूलों में नवमी तक पढ़ाई करने के बाद दसवीं में प्राइवेट परीक्षार्थी के रूप में फार्म भरा था। लिखने की समस्या के कारण मंडल को राइटर की अनुमति देने के लिए आवेदन लगाया और तनु मालवीय को राइटर बनाया। मंगलवार सुबह शहर के उत्कृष्ट स्कूल परीक्षा केंद्र में पिता लेकर पहुंचे। केंद्र में उसके लिए अतिरिक्त कक्ष का इंतजाम किया गया था, जहां छात्र ने बोलकर ढाई घंटे में पेपर हल किया राइटर तनु ने उत्तरपुस्तिका में लिखा।
937 विद्यार्थी रहे अनुपस्थित, नहीं बना एक भी नकल प्रकरण
संस्कृत के पेपर में 937 छात्र-छात्राएं अनुपस्थित रहे। जिले के 130 परीक्षा केंद्रों में 25 हजार 357 परीक्षार्थी सम्मिलित होने वाले थे। इनमें से 937 के अनुपस्थित रहने के कारण 24 हजार 420 परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी। बुधवार को 12वीं के अंग्रेजी मीडियम के अंग्रेजी विषय का पेपर होगा।
बैतूल। खोद में बैठकर आया छात्र। दिव्यांग छात्र बोलता हुआ और 9वीं की छात्रा राइटर बनकर लिखती हुई।
ललक : दिव्यांग ने ढाई घंटे में बोलकर हल किया पर्चा, छात्रा ने लिखी कॉपी
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source https://www.bhaskar.com/mp/betul/news/mp-news-a-student-with-disabilities-came-to-sit-in-his-lap-and-became-a-student-of-class-9-064513-6770962.html
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