Monday, January 6, 2020

ट्रांसजेंडर बालक को जबरन नहीं ले जा सकेगा कोई, आपत्तिजनक टिप्पणी करने पर होगी जेल

अलीम बजमी | भोपाल .अब अगर किसी ने ट्रांसजेंडर को देखकर आपत्तिजनक टिप्पणी या उसे सामाजिक रूप से लज्जित करने का प्रयास किया तो उसे अधिकतम दो साल की सजा हो सकती है। कोर्ट चाहे तो जुर्माना लगाकर उसे छोड़ भी सकती है। इसी तरह किसी घर में कोई शिशु ट्रांसजेंडर के रूप में जन्मा है तो उसे कोई जबरन नहीं ले जा सकेगा। न ही संतान के अधिकार से उसे रोका जा सकेगा। ऐसा हुआ तो इसके विरुद्ध भी कानूनी कार्रवाई होगी। ऐसा प्रावधान ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ राइट) एक्ट 2019 में किया गया है। इसका हाल ही में केंद्र सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। अब राज्य शासन नए नियम बनाएगी। संकेत है कि नए वित्त वर्ष से इनकी सुरक्षा, सहायता, सामाजिक पुनर्वास का कानून अमल में आ जाएगा। इसके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी कलेक्टर की होगी।

जिम्मेदारी... अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान करेगा ट्रांसजेंडर का अध्ययन

संस्थान को देंगे 8 लाख
ट्रांसजेंडर पर्सनस(प्रोटेक्शन ऑफ राइट) एक्ट के मुताबिक अब प्रदेश में सेंट्रल के मॉडल एक्ट को लाने के लिए सामाजिक न्याय एवं निशक्त जनकल्याण विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। इसके चलते अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान से ट्रांसजेंडर का अध्ययन कराने का निर्णय लिया है। इसके बदले विभाग 8 लाख रुपए संस्थान को देगा। इसकी रिपोर्ट आने के बाद शैक्षणिक, सामाजिक, आर्थिक और पुनर्वास की जरूरत आदि के आधार पर नियम बनाए जाएंगे। इसके लिए वित्त विभाग बजट देने को अपनी सैद्धांतिक मंजूरी दे चुका है।

  • किसी आयोजन में भाग लेने से नहीं रोक सकेंगे-ट्रांसजेंडर को अब किसी आयोजन में शामिल होने या स्पर्धा में भाग लेने से नहीं रोका जा सकेगा। कलेक्टर को अधिकार होगा कि वह दोषी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दे सके।
  • अजीविका सुनिश्चित होगी-ट्रांसजेंडर को मुख्यधारा में लाने के लिए उसके कौशल उन्नयन के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वह स्वरोजगार हासिल कर सके।
  • स्कूलों को देना होगा प्रवेश -ट्रांसजेंडर बालक को कोई भी शिक्षण संस्थान अपने यहां एडमिशन देने से रोक नहीं सकेगा। उसे शिक्षा अन्य बालकों की तरह दी जाएगी। अन्य बच्चों की तरह उसकी देखरेख हो सकेगी।
  • स्वास्थ्य -ट्रांसजेंडरों की खातिर अब बीमा पॉलिसी सर्वसमावेशी बनाई जाएगी। इसमें लिंग परिवर्तन और हारमोनल थैरेपी को शामिल किया जाएगा। वहीं सरकारी व निजी अस्पतालों में चिकित्सीय परीक्षण के दौरान मेडिकल पर्चे पर ट्रांसजेंडर लिखा जाएगा।

वर्ष 2014 में मिली मान्यता
अप्रैल 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने ‘नालसा जजमेंट’ के तहत एक फैसला सुनाते हुए ट्रांसजेंडरों को तीसरे लिंग के तौर पर मान्यता दी थी। संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत उनके मानवाधिकारों को पहली बार सुरक्षित किया गया था।

अभी तो करा रहे हैं स्टडी
सामाजिक न्याय एवं निशक्त जनकल्याण के संचालक केजी तिवारी का कहना है कि हम ट्रांसजेंडर की स्थिति का अध्ययन करा रहे हैं। अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान से रिपोर्ट मिलने के बाद नए नियम बनाएंगे।



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ट्रांसजेंडर को देखकर आपत्तिजनक टिप्पणी करने पर दो साल तक की सजा।


source https://www.bhaskar.com/mp/bhopal/news/no-one-can-forcibly-take-a-transgender-child-will-be-jailed-for-making-objectionable-remarks-126450667.html

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