Friday, January 24, 2020

देश में राजनीति में अपराधीकरण रोकने के लिए कुछ तो करना ही होगा : सुप्रीम कोर्ट

चुनाव अायाेग ने जताई लाचारी, कहा- चुनावी हलफनामे में अपराध का जिक्र करने का नियम भी कारगर नहीं


भास्कर न्यूज| नई दिल्ली . सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि देश में राजनीति में अपराधीकरण को रोकने के लिए कुछ तो करना ही होगा। जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस अारएफ नरीमन और एस रविंद्र भट की पीठ ने चुनाव आयोग व याचिकाकर्ता से पूछा कि इसे कैसे रोका जा सकता है? इस बाबत 4 सप्ताह में कोर्ट को सुझाव देने काे कहा है। भाजपा नेता व वकील अश्वनी उपाध्याय ने यह जनहित याचिका दायर की है। इसमें राजनीतिक पार्टियों को आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने के लिए टिकट न देने के आदेश जारी किए जाने की मांग की गई है।

सुनवाई के दाैरान चुनाव आयोग ने शुक्रवार को कहा कि शीर्ष कोर्ट ने 2018 में सभी चुनावी उम्मीदवारों के लिए निर्देश जारी किया था कि वे चुनाव नामांकन दायर करने से पूर्व प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में खुद पर दर्ज आपराधिक मामलों की सूचना अपने क्षेत्र की जनता को देंगे। मगर उनके इस निर्देश से भी राजनीति में अपराधीकरण पर रोक लगाने में मदद नहीं मिल रही है। असल में राजनीतिक दलों को कोर्ट द्वारा यह कहा जाना चाहिए कि वे आपराधिक पृष्ठभूमि वाले नेताओं को चुनाव लड़ने के लिए टिकट ही न दें। जस्टिस नरीमन ने कहा कि देश में राजनीति के अपराधीकरण को रोकने के लिए कुछ तो करना ही होगा। इस पर विस्तृत रूप से विचार किए जाने की जरूरत है कि क्या राजनीतिक दलों को आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति को टिकट नहीं देने के लिए कहा जा सकता है? अश्वनी उपाध्याय ने आपराधिक पृष्ठभूमि वाले नेताओं के चुनाव लड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग को लेकर दायर याचिका में कहा है कि जनप्रतिनिधि अधिनियम की धारा 8 दोषी नेताओं को चुनाव लड़ने से तो रोकती है, लेकिन ऐसे नेता जिन पर केवल मुकदमा चल रहा है, वे चुनाव लड़ सकते हैं।



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source https://www.bhaskar.com/mp/dhar/news/mp-news-something-has-to-be-done-to-stop-criminalization-in-politics-in-the-country-supreme-court-071029-6473034.html

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