Monday, July 6, 2020

महावीरजी ने संसार को संस्कार के शब्दों से किया है अलंकृत

आज वीर महा अति वीर भगवान महावीर स्वामी का वीर शासन जयंती पर्व है। यह वीरों का पर्व है। इस जगत में पूजनीय वही हुए जो वीर है और जो पूजनीय है। उनका ही शासन होना चाहिए। सोमवार को नगर में विराजित आचार्य प्रणाम सागर महाराज ने वीर शासन जयंती पर प्रवचनों के माध्यम से कहा। उन्होंने कहा महावीर स्वामी ने इस जगत को संस्कार व सम्मान के शब्दों से अलंकृत किया है। महावीर स्वामी की दिव्य वाणी ही है जिसकी बदौलत संस्कारों को सम्मान व पूजनीय स्थान मिलता है। शुभ दिवस में श्री वीर प्रभु की दिव्य देशना 66 दिनों के अंतराल के बाद विपुलाचल पर्वत पर समोशरण के मध्य खिरी थी। दीक्षा लेने के बाद महावीर जी ने मौन व्रत अंगीकार किया। बारह वर्ष की तपस्या के बाद ऋजुकूला नदी के तट पर शुक्ल ध्यान पूर्वक केवल ज्ञान प्राप्त किया। उसी समय इंद्र की आज्ञा से कुबेर ने समवशरण की रचना की। लेकिन प्रभू की वाणी नहीं खीरी। ऐसे 66 दिन हो गए।
सन्मति जैन ने बताया वर्धमान की नगरी कहे जाने वाले सनावद में आचार्य श्री ने वीर शासन जयंती पर वीर शासन जयंति का महत्व बताते हुए कहा इंद्र ने अवधि ज्ञान से यह जाना कि यहां गणधर का अभाव है। गणधर होने की योग्यता इंद्रभूति गौतम में है। ऐसा जानकर युक्ति पूर्वक श्लोक का अर्थ पूछा। इंद्रभूति गौतम ने श्लोक का अर्थ तो उस समय नहीं बताया लेकिन महावीर प्रभु के समवशरण में अपने 500 शिष्यों सहित पधार गए। वहां समवशरण की अद्भुत रचना व मानस्तंभ को देखते ही उनका मान गलित हो गया। उसी समय आपने जैनेश्वरी दीक्षा धारण कर अनेक प्रकार से महावीर स्वामी की स्तुति की। उन्हें गणधर पद की प्राप्ति हुई। वह प्रथम गणधर कहलाएं। उसी समय 18 महाभाषा व 700 लघुभाषा सहित दिव्य ध्वनि खिरने लगी। गणधर गौतम स्वामी ने अंतर्मुहूर्त में द्वादशांग रूप जिनवाणी की रचना कर दी। ऐसी महाकल्याणकारी जिनवाणी आज हमारे पास है जिससे हमारा व सभी जगत के जीवों का कल्याण हो रहा है। आचार्य श्री सनावद में चातुर्मास की घोषणा की। जिसकी कलश स्थापना 9 जुलाई को की जाएगी।



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source https://www.bhaskar.com/local/mp/khandwa/sanavad/news/mahavirji-has-embellished-the-world-with-words-of-rites-127486499.html

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