श्रावण का पहला दिन सोमवार। महाकाल भक्तों के लिए इससे बड़ा त्योहार नहीं था। कोरोना की पाबंदी थी लेकिन न दर्शन करने वालों ने हार मानी और न सवारी के जोश में कोई कमी नजर आई। सवारी में आने पर रोक के बावजूद भक्तों को जहां से भी सवारी देखने का मौका मिला, उन्होंने नहीं छोड़ा। फिर चाहे रास्ते में आए घरों की बालकनियां हो या नृसिंहघाट की मल्टियों की छत। मिट्टी के टीले और बेरिकेड्स के पीछे भक्तों की भीड़ मौजूद थी। प्रशासन के प्रतिबंध पर भक्तों का उल्लास हावी था, जो महाकाल के जयकारों के रूप में गूंजता रहा। सबसे खास बात यह थी कि सवारी मार्ग बदलने के कारण पहली बार शिव महाकाल की सवारी शक्तिपीठ हरसिद्धि के द्वार से निकली। जब पालकी हरसिद्धि मंदिर के सामने पहली बार पूजन के लिए रुकी तो शहर में हरि-हर मिलन की परंपरा के साथ हर और हरसिद्धि के मिलन का नया आयाम रच गया।
महाकाल मंदिर के सभागृह में महाकाल के चंद्रमौलेश्वर स्वरूप के पूजन से लेकर सवारी में अच्छी खासी भीड़ घुस गई थी। सांसद अनिल फिरोजिया, मंत्री डॉ मोहन यादव के साथ कई भाजपा नेताओं को एंट्री मिल गई। यह भीड़ रामघाट पर पूजन के दौरान भी दिखाई दी। पालकी पूजन कलेक्टर आशीष सिंह ने सपत्नीक किया। एसपी मनोजकुमार सिंह भी मौजूद थे।
पाबंदी के बावजूद चारधाम की तरफ से आ गए सैकड़ों लोग, पुलिस से बोले- बैरिकेड्स खोलो
महाकालेश्वर की सवारी के दर्शन करने के लिए पाबंदी के बावजूद लोग हरसिद्धि व रामघाट मार्ग की धर्मशाला व घरों की छत-गैलरी पर आकर खड़े हो गए। चारधाम मंदिर मार्ग से भी दो सौ से अधिक लोग हरसिद्धि चौराहा की तरफ आने लगे। कुछ बैरिकेड्स हटाने का प्रयास करते हुए अंदर भी आ गए थे जिन्हें पुलिस ने वापस भिजवाया और जब तक सवारी निकले पुलिस बल पूरे समय तैनात रहा।
5 मिनट पहले शुरू, 20 मिनट पहले मंदिर पहुंच गई
सवारी पूजन-आरती के बाद शाम 3.55 बजे मंदिर से रवाना हुई, जबकि समय 4 बजे है। हरसिद्धि चौराहा, नृसिंहघाट मार्ग होकर सवारी 4.35 बजे रामघाट पहुंच गई थी। यहां पूजन आरती के बाद सवारी 4.56 बजे रामघाट से रवाना होकर रामानुजकोट, हरसिद्धि चौराहा होते हुए 5.20 बजे हरसिद्धि मंदिर और 5.40 बजे वापस मंदिर पहुंच गई थी। जबकि समय 6 बजे अनुमानित था। पुजारी प्रदीप गुरु के अनुसार अब अगली सवारी 13 जुलाई को निकलेगी।
अन्य जिले से पुराने अधिकारियों को बुलवाया
सवारी व्यवस्था के लिए देवास समेत अन्य जिले से पुराने अनुभवी अधिकारियों को बुलवाया था जो पूर्व में यहां रहते हुए सवारी इंतजाम संभालते रहे। उन्होंने रस्सा दल की व्यवस्था देखी। कब इसे रोकना है कब तेज करना है सबकुछ टाइमिंग के हिसाब से किया गया।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/ujjain/news/there-were-many-restrictions-but-could-not-stop-the-devotees-from-seeing-127486520.html
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