Wednesday, April 8, 2020

शहर में लोग सब्जी के लिए हो रहे परेशान, उधर पास के इलाकों में खेतों में खराब हो रही फसल

पिछले आठ दिन से मंडी न खुलने के कारण जहां एक ओर शहर के लोगों को सब्जी नहीं मिल पा रही है, वहीं दूसरी ओर शहर से सटे इलाकों में खेतों में सब्जी की पैदावार करने वाले किसानोें के सामने ये संकट खड़ा हो गया है कि यदि जल्द ही प्रशासन ने सब्जी बेचने की अनुमति नहीं दी तो उनकी तीन माह की मेहनत बेकार हो जाएगी। गोभी, भिंडी, लौकी, तोरई, धनियां, मिर्च और बैंगन जैसी सब्जी खेतों में सड़ना शुरू हो गई हैं। किसानों का कहना है कि मंडी के व्यापारियों से यदि प्रशासन की बातचीत सफल नहीं हो पा रही है तो कम से कम किसान को सीधे सब्जी बेचने की मंजूरी दे दी जाए ताकि ऐसे परिवारों के सामने रोजी रोटी का संकट तो खड़ा न हो।


दैनिक भास्कर की टीम ने बुधवार को गिरवाई क्षेत्र का जायजा लिया तो यहां खेत तो हरे भरे दिखाई दिए लेकिन किसानों के चेहरे मुरझाए हुए थे। तीन माह की मेहनत के बाद भरपूर सब्जी की पैदावार होने से खुश हो रहे किसानों के जीवन में लॉकडाउन का ग्रहण लग गया। मंडी में भीड़ रोकने की व्यवस्था बना पाने में असफल रहे अफसरों ने समस्या का समाधान मंडी बंद कर निकाला। इससे सब्जी की पैदावार करने वाले किसानों के सामने संकट खड़ा हो गया।

मेला मैदान के लिए व्यापारी तैयार और प्रशासन भी, फिर भी नहीं बनी बात
लक्ष्मीगंज सब्जीमंडी में लोगों की बढ़ती भीड़ पर नियंत्रण न हो पाने के बाद पिछले सप्ताह प्रशासन ने मेला मैदान में बड़ी मंडी को शिफ्ट करने का प्लान तैयार किया था। इस मामले को लेकर मंडी के व्यापारियों का कहना है कि उन्होंने इस मामले पर अपनी सहमति दे दी थी, लेकिन बाद में प्रशासन की तरफ से कोई आदेश जारी नहीं किया गया। एडीएम किशोर कान्याल का कहना है कि मंडी चालू कराने के संबंध में जल्द निर्णय लिया जाएगा।

बाहर से ही भगा देतेे हैं सब्जी के ट्रैक्टर पांच गुना महंगी बेच रहे ठेले वाले
आस-पास के किसान अपने खेतों से ट्रैक्टर में सब्जी लेकर रोजाना गोल पहाड़िया व गोला का मंदिर क्षेत्र में आते हैं। लेकिन प्रशासन की टीमें उन्हें रोजाना खदेड़ देती हैं। मजबूरी में वे अपना माल काफी कम दामों में ठेले वालों को चोरी छिपे बेचकर चले जाते हैं। ठेले वाले इसी सब्जी को कॉलोनियों में जाकर चार से पांच गुना महंगे दामों पर बेचते हैं। पिछले दो दिन से सब्जी के ट्रैक्टरों को पकड़कर प्रशासन पूरी सब्जी ले रहा है, उस सब्जी को एप के जरिए लोगों को बेचा जा रहा है।

किसानों का दर्द

  • किराए की जमीन पर खीरा, पालक और कद्दू की फसल लगाई थी। फसल तैयार होने में 8-10 दिन का समय लगेगा। इस समय कीटनाशक दवाओं की जरूरत है, नहीं मिल पा रहीं। इससे कुछ फसल खराब होगी। तैयार होने के बाद बाजार नहीं खुला तो पूरी मेहनत और पैसा बेकार जाएगा। -मक्खन कुशवाह
  • पांच बीघा जमीन में गोभी की फसल लगाई थी। हम सभी भाइयों के आठ परिवारों ने तीन महीने तक पसीना बहाया तब जाकर फसल तैयार हुई। अब बाजार बंद होने से फसल बेचने का संकट खड़ा हो गया है। जल्द ही अनुमति नहीं दी तो फसल खेत में ही खराब हो जाएगी। -प्रहलाद सिंह
  • 16 बीघा जमीन में फूलों की खेती होती है। नवदुर्गा से लेकर हनुमान जयंती तक बाजार बंद होने के कारण फूलों की बिक्री नहीं हो पाई। हमारे सात परिवारों का यही व्यवसाय है। ये सीजन तो पूरा बेकार हो गया। अब तो बारिश के बाद ही कुछ उम्मीद है। -भूपेंद्र कुशवाह


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खेतों में तैयार खड़ी फूल गोभी की फसल।


source https://www.bhaskar.com/local/mp/gwalior/news/people-in-the-city-are-getting-worried-for-the-vegetables-the-crops-falling-in-the-fields-in-the-nearby-areas-127135336.html

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