शासकीय ललित कला महाविद्यालय में वार्षिक प्रदर्शनी का अायाेजन किया गया। चित्रकला, मूर्तिकला अादि की प्रदर्शनी लगाई गई थी। इसी अवसर गत दिवस कलाब्धि नाम से शास्त्रीय संगीत का कार्यक्रम शाम 5.30 बजे से शाम सात बजे तक हुअा। इसमें पंडित देशराज वशिष्ठ ने राग साेहनी में ताल एक ताल में विलंबित रचना, श्याम माे पे पिचकारी डाल गयाे अाैर मध्यलय की रचना मग में श्याम छियाे न जात तथा द्रुत लय में तराना प्रस्तुत किया। गायकी के दाैरान करतल ध्वनि से श्राेताअाें ने उनका उत्साहवर्धन किया। उन्हाेंने एेरी सखी मंगल गाअाे री की प्रस्तुति भी दी। पं. देशराज ने अष्ट प्रकार की गायकी का गायन के द्वारा वर्णन किया।
अपनी गायकी के दाैरान पं. वशिष्ठ ने अनेक तानाें के प्रकार भी पेश किए। ग्वालियर घराने की प्राचीन गायकी का भी पंडित वरिष्ठ ने प्रस्तुतिकरण किया। तबले पर संगत पंकज राठाैर ने की। हारमाेनियम पर दीपक खलतकर ने की। मुख्य अतिथि लक्ष्मीकांत जोशी, डाॅ. दीपेंद्र शर्मा, कवि संदीप शर्मा थे। इस अवसर पर महाविद्यालय प्राचार्य कांति तिर्की, वरिष्ठ संगीतकार ईश्वरलाल राठौर, मोहन शर्मा, प्रेम सिकरवार, शशि चौधरी, प्रिया शर्मा, भूपेंद्र चौहान, संस्कार भारती से अतुल कलभंवर, पराग भाैंसले, रवींद्र डोडवे, मनीष खसराल व धार शहर के लगभग सभी शास्त्रीय संगीत श्रोता उपस्थित हुए। प्राचार्य तिर्की ने आभार माना।
जाने क्या हाेती है अष्ट प्रकार की गायकी
पं. वरिष्ठ के अनुसार अष्ट प्रकार की गायकी में अलग-अलग प्रयाेग हाेते हैं। जिसमें मीढ, मुर्की, जमजमा, अांदाेलन, घसीट, बहलावा, बढ़त, गमक अादि का वर्णन गाकर किया।
धार. शास्त्रीय संगीत कार्यक्रम में प्रस्तुति देते हुए पंडित देशराज वरिष्ठ।
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source https://www.bhaskar.com/mp/dhar/news/mp-news-shyam-mae-pe-pitkhari-pyaar-delayed-composition-in-a-rhythm-070600-6802063.html
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