जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र (डीडीआरसी) को जिले में संचालित करने के लिए कलेक्टर सहित पांच सदस्यीय टीम ने पिछले दिनों 13 कर्मचारियों की भर्ती की। इस स्टाफ में एक भी दिव्यांग की भर्ती न होने से इन दिव्यांगों ने शिकायत की है। साथ ही भर्ती प्रक्रिया के दौरान विज्ञापन में दिए गए नियमों का पालन नहीं किया गया।
इसलिए प्रक्रिया में शामिल हुए अभ्यर्थियों ने इस भर्ती को निरस्त कर, फिर से कराने जिला प्रशासन को आवेदन दिया है।
जिला मुख्यालय पर जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र (डीडीआरसी) का संचालन किया जाना है। इसका संचालन उप संचालक एवं सामाजिक न्याय विभाग द्वारा प्रगतिशील विकलांग संसार के माध्यम से किया जाएगा। इस केंद्र के तहत जिले भर के दिव्यांगों की सहायता करने के लिए 13 कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया पूरी करने विज्ञापन प्रकाशित किया गया।
जिसमें मोबिलिटी इंस्ट्रक्टर पद के अभ्यर्थी को अनुभव के अंक देना नहीं लिखा गया। पर इस पद पर भर्ती किए गए अभ्यर्थी को इसका लाभ दिया गया है। इसलिए इस पद की भर्ती प्रक्रिया को गलत बताते हुए अभ्यर्थी प्रीति पटेल और अरविंद पटेल ने इसे निरस्त करने की मांग करने हुए कलेक्टर और उप संचालक पंचायत को आवेदन दिया है।
इसी प्रकार विशेष शिक्षक पद की भर्ती प्रक्रिया में अभ्यर्थी मुकेश पटेल को दिव्यांगता के अंक नहीं दिए गए। इस कारण इस केंद्र के स्टाफ में एक भी दिव्यांग की भर्ती नहीं हाे सकी। इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इस प्रक्रिया को निरस्त करने के लिए मुकेश ने जिला प्रशासन को आवेदन दिया है।
डीडीआरसी के यह हैं मुख्य उद्देश्य
- कैंप एप्रोच के तहत विकलांग व्यक्तियों का सर्वेक्षण और पहचान करना।
- दिव्यांगों को प्रोत्साहित करना, विकलांगता से बचाव करना और प्रारंभिक सहायता करना।
- सहायक उपकरणों का आकलन करना, सहायक उपकरणों का प्रावधान, फिटमेंट, सहायक उपकरणों की मरम्मत।
- उपचारात्मक सेवाएं यानि शारीरिक उपचार, व्यावसायिक उपचार, वाक उपचार आदि।
- विकलांगता प्रमाण पत्र, बस पास और विकलांग व्यक्तियों के लिए अन्य प्रकार की रियायतें व सुविधाएं प्रदान करना।
- रोजगार के लिए बैंकों सहित अन्य वित्तीय संस्थानों के माध्यम से ऋण की व्यवस्था करना।
- विकलांग व्यक्तियों, उनके अभिभावकों और पारिवारिक सदस्यों की काउंसलिंग करना और बाधा मुक्त वातावरण का संवर्धन करना।
- विकलांग व्यक्तियों की व्यावसायिक प्रशिक्षण के संवर्धन और नियोजन के लिए कई माध्यमों से सहायक और अनुपूरक सेवाएं प्रदान करना।
- अध्यापकों, समुदाय और परिवारों को प्रशिक्षण प्रदान करना।
- विकलांग व्यक्तियों को शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए प्रेरित करना, प्रोत्साहित करना और रोजगार प्रदान करना।
- व्यावसायिक प्रशिक्षण, डिजाइन करना और उचित रोजगार की पहचान करना, ताकि उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा सके।
समिति के सामने रखेंगे बात, टीम करेगी निर्णय
^शासन के आदेशानुसार डीडीआरसी अभ्यर्थियों की चयन प्रक्रिया के लिए पांच सदस्यीय टीम गठित कर 13 अभ्यर्थियों का चयन किया गया। इस प्रक्रिया के दौरान कलेक्टर शीलेंद्र सिंह के निर्देशन में जिला पंचायत सीईओ अमर बहादुर सिंह, महिला एवं बाल विकास अधिकारी संजय जैन, सीएमएचओ डॉ. सतीश चौबे सहित स्वयं मेरे द्वारा नियमों का पालन कर चयन किया गया। इसके बाद भी किसी अभ्यर्थी को इस प्रक्रिया पर आपत्ति है तो मामला पांच सदस्यीय टीम के सामने रखा जाएगा। इस आपत्ति पर क्या कार्रवाई करना है, यह टीम निर्णय लेगी।
- पियूष भट्ट, संयुक्त कलेक्टर व उप संचालक न्याय विभाग
29 दिसंबर को 5 सदस्यीय टीम द्वारा इन 13 पदों पर की गईं भर्ती
कलेक्टर, जिपं सीईओ, महिला एवं बाल विकास अधिकारी, सीएमएचओ और उप संचालक एवं सामाजिक न्याय विभाग द्वारा 29 दिसंबर को डीडीआरसी के लिए 13 पदों की भर्ती की गई। जिसमें क्लीनिक साईक्लोजिस्ट, सीनियर प्रोस्थेटिस्ट, एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफीसर, प्रोस्थेटिस्ट/ आर्थोटिस्ट टेक्निशियन, ईयर मोल्ड टेक्निशियन, मोबिलिटी इंस्ट्रक्टर, मल्टी परपज रिव्हलीटेशन, विशेष शिक्षक, जनरल स्टाफ क्लर्क, अटेडेंट/प्यून/मेसेंजर और चौकीदार के पद शामिल हैं।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/sagar/chhatarpur/news/disturbances-in-appointments-to-13-posts-of-rehabilitation-center-allegations-not-a-single-disabled-person-128082315.html
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