ओपन बुक पद्धति से स्टूडेंट्स के मन से एग्जाम फाेबिया जरूर खत्म हाे गया है लेकिन नियत समय में किसी टास्क काे कर सकने का कान्फिडेंस डेवलप करना कठिन हाेगा। शिक्षा विभाग ने कक्षा नवमीं से बारहवीं तक की छह माही परीक्षा ओपन बुक पद्धति से ली।
परीक्षा में शामिल स्टूडेंट्स ने घर बैठकर प्रश्नपत्र हल किया। 78 प्रतिशत स्टूडेंट्स ने जवाब सही लिखे। वैकल्पिक प्रश्न और अनसीन पैसेज में गलतियां ना के बराबर हुई। उत्तरपुस्तिकाएं ज्यादा साफ सुथरी हैं केवल वही स्टूडेंट्स सही उत्तर नहीं लिख पाए जिन्हाेंने ऑनलाइन कक्षाओं में समझकर कक्षाएं अटेंड नहीं की है।
ओपन बुक से परीक्षा हाेने के बाद भी शिक्षक अभी तक विमर्श पाेर्टल पर रिजल्ट अपडेट नहीं कर पाए हैं। जबकि शिक्षा विभाग ने 18 नवंबर तक परीक्षा के बाद 30 नवंबर तक जांच के बाद रिजल्ट विमर्श पाेर्टल पर अपडेट करने के निर्देश दिए थे।
निर्धारित समय में टास्क पूरा करना सिखाना हाेगा कठिन
इस पूरी प्रक्रिया में स्टूडेंट्स निर्धारित समय में टास्क पूरा करने, एकाग्रता बढ़ाने, याद रखने की क्षमता बढ़ाने, याद किए हुए काे स्मृति में रखकर उसे अपने शब्दाें में लिखने की कला सिखाने का तरीका है। इससे मस्तिष्क की एक्सरसाइज भी जुड़ी है।
बढ़ती स्पर्धा में परीक्षा में पास हाेना उद्देश्य हाे गया और एग्जाम फाेबिया के रूप में नई बीमारी सामने आई जाे स्टूडेंट्स सुसाइड का कारण बनी। ओपन बुक परीक्षा में निर्धारित समय में टास्क पूरा करने की प्रक्रिया सिखाना कठिन है। हालांकि एग्जाम फाेबिया का डर खत्म हाे गया।
ओपन बुक परीक्षा में कमी
स्टूडेंट्स के बाैद्धिक, शैक्षणिक स्तर का सही मूल्यांकन संभव नहीं
विवेक से प्रश्नपत्र हल करने की क्षमता का आंकलन नहीं हाे रहा है।
पुस्तक और यू ट्यूब से देखकर प्रश्नपत्र हल करने के कारण एक जैसे उत्तर की जांच करना मूल्यांकनकर्ता के लिए कठिन हाे रहा है।
स्टूडेंट्स काे यह लाभ
स्टूडेंट्स बिना किसी डर के प्रश्न के सही उत्तर काे पढ़ते और देखकर लिखते हैं।
समय मिलने से उत्तर पुस्तिका में व्यवस्थित तरीके उत्तर लिखते हैं।
परीक्षा का डर स्टूडेंट्स के मन से खतम हाे गया जिससे परीक्षा के समय तबियत खराब हाेने जैसी समस्याएं कम हुईं।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/hoshangabad/news/78-students-wrote-correct-answers-mistakes-equal-127994640.html
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