इस साल शुरूआत में 10 रुपए किलो तक बिका आलू अब 50 रुपए किलो बिक रहा है। आलू के भाव बढ़ने के बाद आम लोगों की पहुंच से आलू दूर हुआ तो इसकी खपत भी कम हो गई। जिले में औसतन करीब 30 टन आलू की खपत हो रही है। जबकि भाव कम होने पर आलू की खपत करीब 50 टन रहती थी।
स्थानीय थोक व्यापारी द्वारा इसकी वजह आगरा फील्ड में आलू का उत्पादन 31 फीसदी कम होना बता रहे हैं। इसके अलावा पंजाब व हरियाणा के किसान हड़ताल पर हैं। सब्जियों का राजा आलू को थाली में सजाने के लिए लोगों को सोचना पड़ रहा है। वजह है आलू की बढ़ी हुई कीमत। बाजार में आलू फुटकर में 50 रुपए किलो बिक रहा है। ऐसे में आम लोगों की पहुंच आलू से दूर हो गई है। जिले में आगरा फील्ड के आलू की वर्ष भर सप्लाई होती है।
लेकिन इस बार वहां आलू की फसल कमजोर रही। जो औसत की तुलना में 69 फीसदी रही। आलू के थोक विक्रेता रामलखन कुशवाह ने बताया कि एक तो आगरा की फसल कमजोर रही वहीं दूसरी तरफ इस फसल के कमजोर रहने पर पूर्ति पंजाब और साउथ से होती थी जहां इस बार फसल खराब हो गई। यहीं वजह रही है कि नया आलू बाजार में आ चुका है लेकिन पुराने आलू की कीमतें भी आसमान पर अटकी हुई हैं।
वहीं आलू के भाव चढ़ते ही खपत का ग्राफ नीचे आ गया। आलू विक्रेताओं का अनुमान है कि करीब डेढ़ गाड़ी यानी 600 कट्टे (30 टन) प्रतिदिन खपत हो रही है। जबकि जब भाव कम रहते थे तो आलू 50 टन प्रतिदिन बिक जाता था। भाव तेज होने की वजह से अमूमन घरों में हमेशा मौजूद आलू आज जरूरत पर भी ग्राहकों द्वारा खरीदा जा रहा है। आलू से कम भाव दूसरी सब्जियों के होने से ग्राहक उसको खरीद रहे हैं।
सन 2013-14 में 30 रुपए किलो तक बिका था आलू
वर्ष 2013-14 में अभी तक के इतिहास में सबसे महंगा आलू बिका था तब आलू के भाव 30 रुपए किलो तक आ गए थे। इसके बाद से आलू 25 रुपए किलो तक पहुंचा। लेकिन इस बार पुराने सभी रिकार्ड ध्वस्त करते हुए आलू की कीमतों ने नया इतिहास रच दिया।
आगे क्या...
आलू के थोक रामलखन कुशवाह का कहना है कि नया आलू आना शुरू हो गया है। ऐसे में सभी मंडियों में लोकल आलू की आवक बढ़ते ही भाव कम हो जाएंगे। फिलहाल नया आलू 50 रुपए किलो फुटकर में मिल रहा है।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/gwalior/morena/news/production-down-in-agra-farmers-strike-127968640.html
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