बिना सपना देखे सफर तय नहीं होता। सफर की सफलता हमारे बुलंद इरादे ही करा सकते हैं। एकलव्य ने गुरुद्रोण से धनुर्विद्या सीखने का सपना देखा और आखिर उनमें लगन थी। उन्होंने गुरु की प्रतिमा बनाकर अपने सपनों को पूरा किया। देश की आजादी के लिए महात्मा गांधी, भगतसिंह, सुभाषचंद्र बोस ने भी सपने देखे और उन्होंने उन्हें पूरा कर देश को आजाद कराया।
यह बात मुनिराज पुष्पेंद्रविजयजी ने मंगलवार को पीपली बाजार जैन उपाश्रय में धर्मसभा दौरान कही। उन्होंने कहा कि कुछ कर गुजरने के लिए सपने देखना जरूरी है। भक्ति मार्ग भी वैसा ही है, बड़े-बड़े महापुरुष जितने भी हुए सभी ने कोई ना कोई ध्येय जरूर बनाया और हासिल भी किया। मुनिराज जनकचंद्रविजयजी ने कहा कि आदमी के भीतर जब मूर्छा जागृत होती है तो वह मृत्यु के अंतिम चरण तक उसे छोड़ने का नाम नहीं लेता है। मूर्छा, मोह, माया, दुःख का कारण है। प्रभु पार्श्वनाथ भगवान के अट्ठम तप प्रारंभ हुए। इसमें काफी गुरु भक्त इस तप में आगे हुए है। कोरोना संकट से छुटकारे की भावना के साथ शंखेश्वर पार्श्वनाथ भगवान के तेले की तपस्या शुरू हुई।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/ratlam/jaora/news/it-is-necessary-to-dream-to-do-something-pushpendravijay-127514463.html
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