अनलाॅक-1 के तहत बाजार ताे खुल गया, लेकिन पब्लिक ट्रांसपाेर्ट बंद है। ट्रेन नहीं हाेने से आवागमन बसाें पर निर्भर है। सरकार की शर्त है कि 50 फीसदी यात्रियाें काे बैठाकर बसें संचालित की जाएं, लेकिन बस मालिकाें काे यह शर्त नामंजूर है। क्याेंकि इससे बस मालिक एक दिन में जितना कमाएगा, उसे अतिरिक्त उस पर खर्चा पड़ेगा। बसें बंद हाेने का असर ये है कि चालक, परिचालक खाली हाथ बैठे हैं, ऑटाे चालकाें के सामने भी अार्थिक संकट खड़ा हाे गया है। अासपास के क्षेत्र जैसे लेबड़, पीथमपुर, बेटमा अपडाउन करने वालाें की जेब पर पेट्राेल खर्च बढ़ गया है। दूसरी ओर लाॅकडाउन के कारण टूर एंड ट्रेवर्ल्स के धंधे भी चाैपट हाे गए हैं। शादियाें का सीजन गुजर गया। इंदाैर, उज्जैन जाने की अनुमति नहीं है। एेसे में इनके पास बुकिंग नहीं के बराबर है। इन्हीं बेबसियाें के बीच सवाल- आखिर कब पहिए पर लाैटेगी जिंदगियां।
मामला शासन स्तर का
बस मालिक अपनी जगह सही हैं, लेकिन यह मामला शासन स्तर का है। इसमें शासन जाे भी फैसला करेगा हम उस अनुरूप निर्णय लेंगे।’- विक्रमजीतसिंह कंग, अारटीअाे, धार
अलग-अलग रूटों के अनुसार ऐसे समझें नुकसान का गणित
धार से इंदाैर : 65 किमी की दूरी है। 52 सीटर बस राेज औसत दाे फेरे ताे लगाती ही है। इसमें करीब 65 लीटर डीजल 4500 रुपए का, दाे हजार रुपए स्टाफ भत्ता, टाेल टैक्स के 1200 रु., परमिट टैक्स के 730 रु., बीमा किश्त 205 रु., गाड़ी किश्त 123 रु., टायर खर्च 986 व अन्य खर्च 800 रुपए होगा। इसमें 50 प्रतिशत सवारियाें से 6500 रुपए की कमाई हाेगी अाैर खर्च 10 हजार 500 रुपए के करीब आएगा। यानी बस मालिक काे राेज 4 हजार रुपए जेब से भुगतना होगा।
धार से रतलाम : 92 किमी की दूरी है। 50 सीटर बस राेज करीब एक फेरा लगाएगी। इसमें दाे टाेल टैक्स पर 1 हजार रुपए के लगभग टैक्स लगेगा। 3500 रु. का 50 लीटर डीजल लगेगा। 1200 रु. स्टाॅफ खर्च, परमिट टैक्स 133 रु., बीमा 800 रु., गाड़ी किश्त 2000, टायर खर्च 940 रु., अन्य खर्च 400 रुपए लगेगा। धार से रतलाम का किराया 100 रुपए है। कुल खर्च 10 हजार रु. हाेगा। इसमें 50 प्रतिशत सवारियाें पर बस मालिक काे 5 हजार रुपए की कमाई ही हो पाएगी।
धार से झाबुआ: 90 किमी की दूरी है। 35 सीटर बस राेज एक फेरा लगाएगी। टाेल पर 630 रु. टैक्स लगेगा। 5000 रु. का 60 लीटर डीजल लगेगा। 1300 रु. स्टाॅफ खर्च, परमिट टैक्स 700 रु., बीमा 250 रु., गाड़ी किश्त 4166, टायर खर्च 300 रु., अन्य खर्च 500 रु. आएगा। धार से झाबुआका किराया 90 रु. है। कुल खर्च 10 हजार 73 रु.। इसमें 50% सवारी पर बस मालिक काे 3250 रु. कमाई हाेगी और खर्च 12 हजार 846 रु. होगा। यानी 9 हजार 596 रु. मालिक काे राेज जेब से भरना पड़ेगा।
ये 2 बड़े असर
ऑटाे में सवारियां आनहीं रही, पेट्राेल खर्च अतिरिक्त बढ़ा: बसें बंद हाेने से करीब 500 ऑटाे चालकाें की आर्थिक व्यवस्था गड़बड़ा गई है। ऑटाे चालक आशिक माेहम्मद बताते हैं कि सामान्य दिनाें में 11 फेरे लग जाते हैं। प्रत्येक सवारी से औसत 20 रुपए ताे लेते ही हैं। इसमें 10 रुपए का पेट्राेल और 10 रुपए जेब में जाते हैं। प्रतिदिन तीन किमी ऑटाे शहर में घूमता है। मगर सवारियां नहीं आने की स्थिति में परिवार पालन के साथ इसमें पेट्राेल का अतिरिक्त खर्च बढ़ गया है। फिलहाल पेट्राेल की कीमत 78 रुपए है। ऐसे में एक से डेढ़ लीटर पेट्राेल ताे रखना ही पड़ता है। इसके बाद ऑटाे शुरू हुआ है ताे मैंटेनेंस कार्य अलग आएगा। उसका खर्च भी जुड़ेगा। दूसरे ऑटाे चालक शाहबुद्दीन, माे. रईस ने बताया ऑटाे नहीं चलने से कर्ज लेकर घर चलाना पड़ रहा है। स्कूल भी बंद है। वहां से भी आमदनी नहीं हाे रही। अब उम्मीदें बस पर टिकी हैं। जल्द ही बसें चलें ताकि स्थिति सुधरे।
जिले के 30 हजार चालक-परिचालकाें के सामने परिवार चलाने की चिंता: बसें बंद हाेने से जिले के करीब 30 हजार चालक परिचालकाें के सामने परिवार चलाने की चिंता खड़ी हाे गई है। बस पर चलने वाले चालक व क्लीनर काे मासिक वेतन की बजाए 500-500 रुपए राेज के मान से भुगतान हाेता है। यानी जिस दिन चालक या क्लीनर गाड़ी पर अाएगा, उसे उस दिन का वेतन मिलेगा। मगर बीते 62 दिनाें से ज्यादा समय से चालक परिचालक घर बैठे हैं। उन्हें भी शासन-प्रशासन की तरफ से भी काेई मदद नहीं मिल रही है। गाैरतलब है कि गत दिनाें चालक-परिचालकाें ने कलेक्टर श्रीकांत बनाेठ के नाम अपर कलेक्टर शैलेंद्र साेलंकी काे भी ज्ञापन साैंपा था।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/indore/dhar/news/once-the-bus-is-taken-to-indore-there-will-be-a-loss-of-three-and-a-half-thousand-rupees-bus-operators-127365756.html
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