Wednesday, June 3, 2020

न्याय के हक में बेटे को उम्रकैद की सजा दिलाने वाली मां सिस्टम से हारकर झोपड़ी में काट रही दिन; ऊंचे अफसरों को पता चला तो पिघले, बनने लगा घर, खुला खाता

(संदीप तिवारी)मालथौन ब्लॉक के मड़िया कीरत गांव की 65 वर्षीय नीमा बाई आदिवासी की झोपड़ी में दो दिनों से काफी चहल-पहल है। अचानक क्षेत्र के कुछ लोगों सहित पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारी उनका मकान बनवाने में जुट गए हैं। इतना ही नहीं केवायसी नहीं होने के कारण महीनों से बंद पड़ा उनका बैंक खाता भी 1 दिन में चालू हो गया है।

दरअसल यहचमत्कार हुआ कुछ ऊंचे अफसरों की संवेदनशीलता और दखल के चलते। यह संवेदनशीलता जागी नीमा बाई की न्यायाप्रियता और संघर्ष की दर्दनाक दास्तान जानकर। पिछले साल उनके पति की मृत्यु हो चुकी है। बेटा शक के कारण अपनी ही पत्नी की हत्या करने पर 2 साल से उम्रकैद की सजा काट रहा है। इसमें खास बात यह है कि बेटे को सजा नीमा बाई और उनके पोतों (हत्यारे के बेटों) की गवाही पर ही मिली थी। खुरई की एक मजिस्ट्रेट ने एक पोते को पढ़ाई के लिए गोद ले लिया। वे उसे अच्छे संस्थान में पढ़ा भी रही हैं। एक अन्य पोता अजा वर्ग के छात्रावास में रहकर पढ़ता है तो 8 साल का पोता अपनी दादी के साथ ही रहता है।

बेटे को सजा दिलाने और पति की मौत के बाद से नीमाबाई का अभावों से संघर्ष कड़ा हो गया है। नीमा बाई का नाम न तो प्रधानमंत्री आवास की पात्रता सूची में था और न ही उनका गरीबी रेखा कार्ड बना था। इसलिए आवास योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा था। सिस्टम से लड़ते-लड़ते यह वृद्धा थक चुकी थी। तभी उसकी दास्तान पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के एसीएस मनोज श्रीवास्तव को पता चली। उनकी दखल के बाद वृद्धा की कहानी बदलना शुरू हुई है।

मालथौन की वृद्धा की जुबानी...निचले स्तर पर सिस्टम की बेरुखी
वृद्धावस्था पेंशन के पैसे निकालने बैंक खाते पर लगी रोक हटवाने के लिए मैं साल भर से परेशान थी। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही थी। वह अब हट गई है। गांव में कई लोगों को आवास मिले। मैं अपने लिए सरपंच-सचिव से पूछती तो कहते थे कि पात्रता सूची में नाम नहीं है, इसलिए अभी आवास नहीं मिलेगा। अब अफसरों ने स्वयं आकर घर का काम लगा दिया है। जनपद से जो साहब आए थे उन्होंने बोला है कि इस बारिश में पक्के घर में रहने लगोगी। गरीबी रेखा के फॉर्म का भी जल्दी ही बनवाने का बोला है, उसके लिए आवेदन भी हो गया है।

एसीएस के निर्देश के बाद मालथौन सीईओ रात मेंही गांव पहुंचे और सुबह मकान का काम शुरू
जानकारी मिलने पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के एसीएस मनोज श्रीवास्तव ने मंगलवार को जिला पंचायत के सीईओ डॉ. इच्छित गढ़पाले निर्देश दिए कि वे वस्तुस्थिति पता करें। जिला पंचायत सीईओ ने तत्काल ही जनपद सीईओ मालथौन राजीव मिश्रा को गांव जाने के निर्देश दिए। वे रात में ही गांव पहुंचे और देखा कि नीमा बाई एक झोपड़ी में रह रही हैं। जानकारी लेने पर पता लगा कि उनका नाम प्रधानमंत्री आवास योजना की पात्रता सूची जो 2011 के आधार पर तैयार हुई थी, उसमें है ही नहीं। बुधवार को ही नीमा बाई के घर बनाने के लिए नींव खुद गई। मौके पर ईंट, सीमेंट, रेत, लोहा भी पहुंच गया। उनका कहना है कि जल्दी ही नीमा बाई का घर बन जाएगा।

पूरे प्रदेश में दिए निर्देश, सच का साथ देने वालों की मदद जरूरी
मनोज श्रीवास्तव, एसीएस, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभागने कहा किप्रदेश के सभी जिला सीईओ को भी निर्देश दिए हैं कि वे इस तरह के मामले अपने यहां भी पता करवाएं। जहां इस तरह से सच पर चलने वाले और परिवार का सहारा न होने से लोग परेशान हैं, उनकी विभिन्न योजनाओं के माध्यम से मदद करें।



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झोपड़ी में पहुंचे अफसर


source https://www.bhaskar.com/local/mp/sagar/news/days-spent-in-the-hut-after-losing-the-mother-system-to-life-imprisonment-for-the-right-to-justice-when-the-top-officials-came-to-know-the-house-melted-the-house-was-built-open-account-127372815.html

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