कोरोना काल में अपने घर लौटते प्रवासी श्रमिकों की बेबसी ने नारायणगंज और टिकरिया के दर्जन भर युवाओं के मानस को इस कदर झकझोरा की वे अपनी जान और सेहत की परवाह किए बिना इनकी मदद को कूद पड़े। पहल की अभिषेक शर्मा ने और फिर उनके साथ जुड़े संदीप सोनी। अपनी पॉकेट मनी से इन दोनों ने प्रवासी श्रमिकों को भोजन के पैकेट देना शुरू किया। मार्च के आखिरी दिनों में जबकि लॉकडाउन का पहला चरण चल रहा था इनके द्वारा की गई इस पहल में अप्रैल माह में जुड़ी इन दोनों स्थानों के 11 युवाओंं की टीम बनी। इनमें से किसी की छोटी सी अनाज की दुकान थी तो किसी की मोबाइल व साइकिल रिपेयरिंग की दुकान। कुछ युवक अभी पढ़ रहे थे, तो कुछ काम-घंघे की तलाश में थे। बड़ी पूंजी किसी के पास नहीं थी और न ही कोई बहुत संपन्न परिवार से था। लिहाजा जिससे जो संभव हो सका, सामने रखा और जबलपुर हाइवे पर टिकरिया थाना के सामने नि:शुल्क भोजन केन्द्र शुरू कर दिया। लॉक डाउन से अनलॉक के पहले फेस के शुरू होने तक के 72 दिन तक, पूरे 24 घंटे इन युवाओं ने नि:शुल्क भोजन केन्द्र चलाया। इस दरम्यान यहां से गुजरने वाले करीब आठ हजार प्रवासी श्रमिकों ने यहां भोजन किया। कुछ जरूरत मंदों को कपड़े, जूते, चप्पल व अन्य जरूरत का सामान भी दिया गया। जरूरत पडऩे पर उनके रूकने की भी व्यवस्था कराई गई। करीब 350 लोगों के लिए राशन की व्यवस्था भी युवाओं की इस टीम ने कराई।
लाख की बात तो कभी सोच भी नहीं पाते थे
अभिषेक व संदीप की के साथ टीम के रूप में जुडऩे वाले आशीष सोनी, अतुल शर्मा, पंकज साहू, अनुराग शर्मा, धीरज उपाध्याय, अविनाश शर्मा, सतीश साहू, अभिषेक पचौरी, राजेंद्र स्वामी, अनिल साहू व देवेंद्र श्रीवास कहते हैं कि हमे इससे पहले लाख रुपए की बात ही सुनी थी, कभी इतनी बड़ी रकम हम इकट्ठा कर सकेंगे सोचा भी नहीं था। अभिषेक बताते हैं कि हमारे साथियों के पास उनकी पॉकेट मनी तो थी ही हम लोगों का हौसला देख हमारे परिजनों के साथ गांव वालों ने भी मदद की। 72 दिनों के दौरान खर्च हुआ 2 लाख 30 हजार रुपए कैसे इकट्ठा हो गया, हमें पता ही नहीं चला।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/jabalpur/news/two-teams-of-eleven-youths-associated-with-them-together-they-opened-free-food-center-for-migrant-workers-127445151.html
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