जिले में समर्थन मूल्य पर खरीदे गए गेहूं व चना परिवहन की रफ्तार धीमी है। इस लापरवाही की वजह से प्री-मानसून और तूफानी हलचल से हुई बारिश में खुले में पड़ा 25 हजार क्विंटल चना भीग गया। इधर, गेहूं खरीदी बंद हुए सात दिन बीत गए, लेकिन 16000 क्विंटल गेहूं अब भी गांवाें केंद्राें पर खुले में पड़ा है। बारिश से बचाने के लिए गेहूं पर तिरपाल ढांकी गई।
जानकारी के मुताबिक जिले में 15 केंद्राें पर समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी हाे रही है। इनमें से 11 केंद्र वेयर हाउस में बनाए गए हैं। चार केंद्र हरदा, टिमरनी खिरकिया व सिराली मंडी में बनाए गए हैं। अचानक बदले माैसम की वजह से साेमवार रात 1 बजे जाेरदार बारिश हुई। शहर में करीब 30 मिनट हुई बारिश से सड़कें तरबतर हाे गईं। हरदा कृषि उपज मंडी में नीमगांव साेसाइटी समर्थन मूल्य पर चना खरीदी कर रही है। यहीं पर देखें तो समिति ने 450 किसानाें से 22 हजार क्विंटल चना खरीदा। बीती रात तक 15 हजार क्विंटल चने का परिवहन हाे सका था। खुले में रखा 7 हजार क्विंटल चना बारिश में भीग गया। मंगलवार काे अानन-फानन में चना का परिवहन कराया। जानकारी के मुताबिक ट्रांसपाेर्टर ने मेट की ढुलाई में ट्रक लगा रखे हैं। इसकी वजह से जिले में परिवहन की गति काफी धीमी है। हालांकि, अधिकारियाें का दावा है कि बारिश से चना काे नुकसान नहीं हुअा है। जिले में अब तक 7271 किसानाें से 22526 मीट्रिक टन चना खरीदा गया है।
622 क्विं. चना बारिश में भीगा
खिरकिया। सोमवार रात करीब डेढ़ बजे क्षेत्र में बारिश हुई। करीब 40 मिनट की बारिश ने चना की खरीदी कर रही सोसाइटियों की आफत खड़ी की। साथ ही मूंग की कटाई करने की तैयारी में जुटे किसानों की परेशानी भी बढ़ा दी। स्थानीय कृषि उपज मंडी में चौकड़ी और मोरगढ़ी ने किसानों से चना की खरीदी की। लेकिन समय से चना परिवहन नहीं हो सका। बीती रात में बारिश से दोनों केन्द्रों का करीब 622 क्विंटल चना भीग गया। सुबह केन्द्रों पर कर्मचारियों ने तिरपाल से चना ढंकने का काम किया। हालांकि शाम तक दोनों ही केन्द्रों पर ट्रकों के माध्यम से चने का परिवहन भी हो गया। केन्द्रों पर पहले से ही बारिश से बचाव के इंतजाम नहीं होने से चना भीगकर खराब हो गया।
16 हजार क्विं. चना केंद्राें पर
जानकारी के अनुसार जिले में समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी 26 मई काे बंद हाे चुकी है, लेकिन अब भी करीब 16 हजार क्विंटल चना केंद्राें पर पड़ा है। सात दिन तक अधिकारियाें ने केंद्राें पर खुले में पड़े गेहूं का परिवहन कराने की अाेर ध्यान नहीं दिया। हालांकि, केंद्राें पर गेहूं काे तिरपाल से ढंककर रखा गया। इससे गेहूं बारिश में भीगने से बच गया।
खेड़ा वेयर हाउस में 5 दिन में नहीं तुला चना, किसान परेशान
खेड़ा वेयर हाउस में चना तुलाई के लिए किसानाें काे परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पांच-पांच दिनाें से चना की तुलाई नहीं हाे पाई है। जिससे ट्रैक्टर-ट्राॅली की लंबी कतार लगी है। इससे वेयर हाउस पर विवाद की स्थिति बन रही है। रेलवा के किसान पूनम विश्नाेई ने बताया कि सुबह 11 बजे तुलाई शुरू हाेती है। दाेपहर 1 बजे हम्माल भाेजन के लिए छुट्टी कर देते हैं। इसके बाद शाम 6 बजे से फिर तुलाई बंद हाे जाती है। हम्माली की एक ही टाेली है। यही टाेली तुलाई, सिलाई व टेकमार्क लगाने का काम करती है। इस कारण तुलाई की गति धीमी रहती है। किसान ने बताया कि वह 28 मई की शाम काे चना की ट्रैक्टर-ट्राॅली लेकर पहुंचा, लेकिन मंगलवार शाम तक उनका नंबर नहीं अाया। उन्हाेंने कलेक्टर अनुराग वर्मा से खेड़ा वेयर हाउस में चना तुलाई की व्यवस्था दुरूस्त करने की मांग की है।
तिरपाल की व्यवस्था की है
- अखिलेश चाैहान, के मुताबिक, जिले के केंद्राें पर बारिश से चना व गेहूं काे बचाने तिरपाल की व्यवस्था है। मंगलवार काे केंद्राें का निरीक्षण किया। चना कुछ एक स्थान पर थाेड़ा से भीगा है, लेकिन इसमें भी नुकसान नहीं है। साेसाइटियाें काे चना की सुरक्षा के इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/hoshangabad/harda/news/due-to-lack-of-transportation-about-25-thousand-quintal-gram-is-drenched-16-thousand-quintal-wheat-tarpaulin-shielded-127369435.html
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