जिले के किसानाें काे प्रति एकड़ दाे बाेरी यूरिया दिया जा रहा है। एक बाेरी में 45 किलाे यूरिया है। इसके लिए अाधार कार्ड और बही की काॅपी जरूरी है। अन्य जिले के किसानाें काे यूरिया नहीं दिया जा रहा। पिछले साल के यूरिया के संकट से सबक लेकर प्रशासन ने इस बार पूरी तैयारी कर ली है। प्रशासन के मुताबिक जिले में यूरिया काे लेकर काेई भी संकट नहीं है। जिले मंें अभी तक 30 हजार मीट्रिक टन यृूरिया अा गया है। सिंतबर तक पिछले साल 37 हजार मीट्रिक टन यूरिया लगा था। इस बार इसके 40 हजार मीट्रिक टन तक जाने की संभावना है। किसान अभी जिले में बाेवनी ही कर रहे हैं। कृषि उपसंचालक जितेंद्र सिंह ने बताया जिले में खाद का संकट नहीं है। किसानाें काे अभी जरूरत के हिसाब से दाे बाेरी यूरिया दिया जा रहा है। समिति और बाहर बाजार से भी किसानाें काे यूरिया मिल रहा है। किसानाें काे एक एकड़ पर तीन बाेरी यूरिया सिंतबर तक लगता है। अभी दाे बाेरी दिया जा रहा है।
सरकार ने भर्ती कम की तो किसानों ने बढ़ाई थी मात्रा
पिछले साल सरकार ने रासायनिक खादों की खपत कम करने के लिए 50 किलो की बोरी की भर्ती को 45 किलो कर दिया था। इससे जो किसान पहले दो बोरी प्रति एकड़ यूरिया डालता था, अब कईयों ने तीन बोरी डालना शुरू कर दिया है। यानी 135 किलो। जब वैज्ञानिकों के अनुसार 54.8 किलो ही यूरिया मानक स्टैंडर्ड के तहत प्रति एकड़ के लिए पर्याप्त है।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/hoshangabad/news/farmers-getting-the-right-urea-book-and-adhar-card-on-one-acre-of-land-127525201.html
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