नागपंचमी 25 जुलाई शनिवार को रवि योग में मनाई जाएगी। इस दिन शेषनाग, वासुकी, पद्म, महापद्म, तक्षक, कुलीर, कर्कट और शंख नामक अष्टनागों की पूजा करने से ऋणग्रस्तता व बीमारियों से मुक्ति मिलती है। ज्योतिषियों के मुताबिक रवि योग में नाग देवता की पूजा से कालसर्प दोष खत्म हो जाता है।
पं. हिमांशु शुक्ल के अनुसार नाग पंचमी पर चंद्रमा उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र दोपहर 2:17 बजे के बाद हस्त नक्षत्र में चला जाएगा और सूर्य पुष्य नक्षत्र में रहेगा। इससे इस समय रवि योग निर्मित होगा। नाग पंचमी पूरे दिन रहेगी। उन्होंने कहा जिस व्यक्ति की कुंडली में सूर्य, राहु -केतु के साथ बैठा हो या उनसे देखा जा रहा हो या ग्रहण योग हो, कर्ज योग हो, ऐसे जातक नाग पंचमी की पूजा करके ऋण मुक्त हो जाता है।
कन्हैया ने नागपंचमी के दिन ही किया था कालिया नाग का मान मर्दन : भगवान कृष्ण ने कालिया नाग का मान मर्दन नाग पंचमी के दिन ही किया था। शास्त्रों के अनुसार कालिया नाग के जहर के कारण यमुना नदी का एक मील तक का जल जहरीला हो गया था। गोकुलवासी इस क्षेत्र में नहीं जाते थे। एक बार इसी क्षेत्र में गेंद खेलते समय वह पानी में चली गई, जिसे लेने के लिए कन्हैया ने यमुना नदी में छलांग लगा दी। जब भगवान श्रीकृष्ण ने कालिया नाग से गेंद मांगी तो वह क्रोधित हो गया। उसका और श्रीकृष्ण का भीषण युद्ध हुआ, जिसमें वह हार गया। क्षमा मांगने पर भगवान ने उसे माफ कर दिया और यमुना छोड़कर समुद्र में जाने का आदेश दिया।
मनुष्य के मित्र हैं नाग : लोक जीवन में लोगों का नागों से गहरा नाता रहा है। यही कारण वासुकी नाग को भगवान शंकर गले में धारण करते हैं और भगवान विष्णु की शैया शेषनाग पर है। वर्षा ऋतु में अकसर नाग भू गर्भ से निकल कर भू तल पर आ जाते हैं। वह किसी के अहित का कारण न बनें इसके लिए भी नाग देवता को प्रसन्न करने के लिए नाग पंचमी की पूजा की जाती है। पं. शुक्ल ने बताया आध्यत्मिक रूप से सर्प को समृद्धि का कारक बताया गया है। पितृ दोष की निवृत्ति भी सर्प दोष से होती है।
भोलेनाथ का करें अभिषेक
नागपंचमी पर भगवान भोलेनाथ का अभिषेक करने से अभीष्ट की प्राप्ति होती है। ज्योतिषियों का कहना है कि भोलेनाथ का अभिषेक करने से कालसर्प दोष, ग्रह शांति होती है। नाग पंचमीं पर भगवान का दूध, दही, शहद से अभिषेक करना चाहिए। साथ ही उन पर इत्र जरूर चढ़ाना चाहिए।
चंदन, दूध, चावल से करें नाग देवता की पूजा
नाग पंचमी पर नाग देवता, उसकी आकृति, स्थान अथवा भगवान शिव के गले मे पड़े सर्प की मूर्ति की पूजा करने का विधान है। इस दिन भगवान भोलेनाथ पर धतूरा भी चढ़ाना चाहिए। चंदन व चंदन का इत्र, सफेद रंग की वस्तुएं, चावल, दूध आदि से पूजा करनी चाहिए। कभी भी नाग को दूध नहीं पिलाना चाहिए। कहते हैं दूध पिलाने से उसकी मृत्यु हो जाती है, जिससे एक और कालसर्प दोष जीवन मे बंध जाता है।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/indore/jhabua/news/nagpanchami-will-listen-in-ravi-yoga-special-auspicious-for-health-127549814.html
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