जिले की सीमा से निकली नदियां इन दिनों रेत माफिया के लिए कुबेर के खजाने से कम साबित नहीं हो रही। हर रेत कारोबारी थोड़ी सी दबंगई दिखाकर इसे लूटने में लगा है। फिर इस मोटी कमाई की लूट में क्या सरकार के नियम कायदे व कैसी विभाग की गाइड लाइन, इन बातों से उन्हें कोई सरोकार नहीं। हालांकि खनिज विभाग के जिला अधिकारी जिला मुख्यालय पर बैठकर जरूर इस बात का दावा कर रहे हैं कि बारिश के दिनों में कोई नदी से रेत का खनन नहीं कर सकता, लेकिन नदियों में हो रहे अवैध रेत खनन की यह ताजा तस्वीरें शासन-प्रशासन के नियम कायदों को आईना दिखा रही हैं।
नेवज नदी पर हो रहे अवैध व मनमाने रेत खनन की यह सभी तस्वीरें भास्कर टीम द्वारा बुधवार को ली गई है। नदी में पानी होने के बावजूद रेत माफिया नदी की छाती चीरकर अवैध खनन कर रहे हैं, जबकि नियमों की अगर बात करें तो बारिश होते ही नदी से रेत खनन बंद हो जाना चाहिए। लेकिन रेत माफिया बेखौफ गोरखधंधे को अंजाम दे रहे हैं। जिम्मेदारों की मेहरबानी के चलते अवंतिपुर बड़ोदिया तहसील के गांव लालपुरा के समीप नेवज नदी पर अब भी रेत का अवैध कारोबार खूब फलफूल रहा है।
वैसे तो जिले की कालीसिंध व नेवज दोनों ही नदियों से रेत खनन होते कभी भी देखा जा सकता है, लेकिन कालीसिंध में पानी आने के कारण यहां के रेतमाफिया अब नदी में उतरने में असमर्थ हो गए हैं। ऐसे में अब नदी के किनारों के स्टाॅक को खपाने में लगे हुए हैं, लेकिन नेवज नदी नेवज में पानी के बावजूद अब भी बिनाया से लेकर लालपुरा, सालिया व नीमखेड़ी तक का 10 किमी क्षेत्र में धड़ल्ले से रेत खनन किया जा रहा है। बिना रायल्टी के नदी के किनारों पर रेत के बड़े बड़े स्टाॅक भी देखे जा सकते हैं।
सर्दी व गर्मी के आठ माह तक रेत कारोबारी रेत निकालते ही हैं, लेकिन इस बार तो इन कारोबारियों ने बारिश में भी नदी को नोंचना बंद नहीं किया। नदियों के अंदर अब ज्यादा रेत नहीं बची है, लेकिन रेत से होने वाली मोटी कमाई के लालच में इन लोगों की नजर अब नदी के किनारों पर पड़ गई है। अब नदी की कराड़े खोदना शुरू कर दी है। कालीसिंध नदी भी कराड़े खुदने के कारण कई जगह अस्तित्वहीन हो गई है। खास बात यह है कि गांव के चौकीदार, पंच-सरपंच, पटवारी, पुलिस तहसीलदार भी इस अवैध खनन को रोकने के लिए आगे आ सकते हैं, लेकिन इन कारोबारियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती और जिम्मेदार मौन क्यों है।
जबसे भोपाल के ठेकेदार ने शाजापुर जिले की खदानें ली उसके बाद से खनिज विभाग के साथ पुलिस भी नहीं दिखी सख्ती
कालीसिंध व नेवज नदी से रेत निकालने के लिए शुरू से ही अपने अपने क्षेत्र के ठेकेदार नीलामी प्रक्रिया के तहत खदानें लेते थे, लेकिन पिछले वर्ष नई गाइड लाइन के चलते जिले की नदियों का ठेका भोपाल के किसी एक ही ठेकेदार ने ले लिया। उसने फिर अपने हिसाब से क्षेत्रीय ठेकेदारों को खदानें दे दी, जिन्होंने कच्ची रायल्टी पर मनमाना पैसा वसूलकर खनन किया, लेकिन इस दौरान एक बात जरूर देखी गई कि अवैध खनन को लेकर खनिज विभाग का रवैया तो नरम पड़ा ही। साथ ही पुलिस भी सख्त नजर नहीं आई। पुलिस विभाग के कुछ लोगों ने कई बार नाम न छापने की शर्त बताया कि अगर हम गलती से भी रेत के ट्रैक्टरों को रोकते हैं तो 5 मिनट के अंदर ही हमारे अधिकारियों का फोन आ जाता है। इसके बाद हमें रेत के अवैध वाहनों को तो सम्मान के साथ छोड़ना ही पड़ता है। साथ ही साहब लोगों की फटकार भी सुनना पड़ती है। ठेकेदार की बड़ी पकड़ के चलते प्रशासनिक लचीलेपन का ही नतीजा है कि रेत माफिया छाती ठोंक कर कहते हैं कि हमारा कुछ नहीं होगा हमारी पहुंच दूर तक है।
खनन पर प्रतिबंध है : जिला खनिज अधिकारी आर.एस. उइके का कहना है कि बारिश के दिनों में नदी से रेत खनन का कार्य पूर्णतः प्रतिबंधित है। नदियों से रेत नहीं निकाली जा रही है और अगर कहीं निकाल रहे हैं तो उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
1. लालपुरा के पास नेवज नदी से इस तरह से रेत भरकर निकलता रेत का ट्रैक्टर।
2. लालपुरा में अवैध रेत स्टाक से रेत भरते माफिया।

3. घाटी पर ट्रैक्टर फंसने पर दूसरे वाहन वाले ने 500 रुपए लेकर ऊपर चढ़ाया।

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source https://www.bhaskar.com/local/mp/ujjain/shajapur/news/officials-said-illegal-mining-is-not-happening-anywhere-in-the-rain-sand-mafia-are-doing-business-without-fear-127542640.html
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