जिले में 4 साल पहले 75 हजार हेक्टेयर में उड़द बाेई जाती थी। सोयाबीन का रकबा 84 हजार 500 हेक्टेयर था। दाेनाें के बीच 9 हजार 500 हेक्टेयर का अंतर था। लेकिन उड़द कटाई के समय बारिश हाेने से नुकसान हाेने के कारण। किसानाें ने सोयाबीन का रकबा बढ़ा दिया। नतीजा यह हुआ कि उड़द कर रकबा तीन सालाें से 23 हजार 700 फिर 7 हजार 800 और इस बार सिर्फ 5000 हेक्टेयर पर पहुंच गया। वहीं सोयाबीन कर रकबा बढ़कर इस साल 1 लाख 67 हजार हेक्टेयर पर पहुंचेगा।
उड़द फसल में किसान रुचि लेने लगेथे। 2017-18 सोयाबीन की 84 हजार 500 हेक्टेयर में बाेवनी हुई। उड़द 75 हजार हे. में बाेई गई। अगले साल उड़द का रकबा घटकर 23700 हेक्टेयर बचा। सोयाबीन में बढ़कर 1 लाख 45 हजार हेक्टेयर पर पहुंचा। 2019-20 में जिले में 1821.8 मिमी बारिश हुई। उड़द काे नुकसान हुआ। ताे रकबा घटकर 7800 पर सिमट गया। सोयाबीन का रकबा बढ़कर 1.64 लाख हाे गया। उड़द में घटती रुचि के कारण इस साल 5000 हेक्टेयर का लक्ष्य है।
सोयाबीन का नया बीज 2029 व आरबीएस 2001-4 आया
इस सीजन में 46 हजार 645 क्विंटल सोयाबीन बीज लगेगा। 38500 क्विंटल उपलब्ध है। मक्का, मूंग, उड़द जरूरत अनुसार उपलब्ध है। सहायक संचालक कपिल बेड़ा की माने ताे यूरिया 10200 मीट्रिक टन, डीएपी 9500, पाेटाश 914 व सुपर फास्फेट 3550 मीट्रिक टन है, जाे पर्याप्त है। डीडीए एमपीएस चंद्रावत बताते हैं कि तय लक्ष्य में 30 प्रतिशत बदलाव आदर्श माना जाता है। इस बार कुल रकबे में 35 प्रतिशत का प्रमाेशन की काेशिश है। वे बताते हैं कि बारिश देर से हाेने, समय पर खाद-बीज न मिलने पर किसान तय वेरायटी बदलते हैं। इस बार सोयाबीन का नया बीज 2029 व आरबीएस 2001-4 पहली बार प्रमाेट किया है। सीहाेर में इनकी पैदावार 20-25 क्विंटल हेक्टेयर मिली है।
लाभ के बजाय मक्का, मूंग फसल दे रही है घाटा
मक्का, मूंग के भाव नहीं मिलने से किसानों को दिक्कत आ रही है। मक्का का समर्थन मूल्य 1725 रुपए क्विंटल है। अभी यह 1000 से 1200 रुपए के बीच बिक रही है। मूंग का समर्थन मूल्य 7050 रुपए क्विंटल है। सरकारी खरीदी नहीं हाेने से यह 5500-6000 रुपए क्विंटल बिक रहा है। इस बार 12-15 क्विंटल हेक्टेयर का औसत उत्पादन हुआ है।
पांचवें साल औसत से ज्यादा हुई बारिश : जिले में 2019 में औसत यानि 1261 मिमी से ज्यादा 1821.8 मिमी बारिश हुई। 2015 व 16 में क्रमश. 1053.2 व 1066.7 मिमी बारिश हुई। 2017 व 2018 में फिर बारिश बीते दाे साल की तुलना में 225 मिमी से 300 मिमी तक कम हुई।
जिले में आज तक नहीं बना माैसम विज्ञान केंद्र
7 जुलाई 2020 काे हरदा काे जिला बने 21 साल हाे जाएंगे। लेकिन कृषि प्रधान जिले में सांसद, विधायकों ने माैसम विज्ञान केंद्र, फूड पार्क खुलवाने में रुचि नहीं ली। किसानाें काे माैसम की पहले से जानकारी नहीं मिल पाती है। ऐसे में अक्सर नुकसान उठाना पड़ता है। फूड पार्क बने ताे लाेगाें काे राेजगार मिल सकता है। गेहूं पैदावार में यह होशंगाबाद के बाद दूसरे नंबर पर है।
4 साल में 70 हजार हे. रकबा घटा उड़द का
4 साल पहले उड़द सोयाबीन का रकबा लगभग बराबर था। बारिश से उड़द काे नुकसान हुआ। किसानाें ने सोयाबीन का रुख किया। धीरे-धीरे उड़द से दूरी बढ़ती गई। 4 साल में 70 हजार हेक्टेयर रकबा घटा। खाद, बीज पर्याप्त है। इस बार सोयाबीन की दाे नई वेरायटी प्रमाेट की है।
-एमपीएस चंद्रावत, उप संचालक कृषि, हरदा

Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
source https://www.bhaskar.com/local/mp/hoshangabad/harda/news/four-years-ago-urad-used-to-be-sown-in-75-thousand-hectares-in-the-district-which-is-now-5-thousand-hectares-soybean-rises-to-167-lakh-hectare-127421713.html
No comments:
Post a Comment