Saturday, June 6, 2020

जिन 7 बड़े कारखानों में मई से बनने लगती हैं मूर्तियां, वे अभी भी लॉक

लॉकडाउन का असर इस साल के तीज और त्योहारों पर भी पड़ेगा। शहर में मिट्टी की मूर्तियां बनाने वाले सात कारखाने अभी भी शुरू नहीं हुए हैं, जबकि 15 मई के पहले मूर्तियां बनना शुरू हो जाती हैं। कोरोना के कारण न तो यहां बंगाली कारीगर हैं और न कच्चा मटेरियल। यदि कारखाने जून तक शुरू नहीं हो पाए तो शहर के आधे स्थानों पर गणेशजी की मनपसंद मूर्तियों की स्थापना नहीं हो पाएगी। वहीं कारखाना संचालकों को पंडाल वालों ने चिंता जताई है कि लॉकडाउन के प्रभाव से इस साल चंदा मिलने की उम्मीद भी कम है, ऐसे में बड़े आयोजन होना मुश्किल है।


बंगाली चौराहा और रिवर साइड रोड पर गणेश और दुर्गाजी की प्रतिमाएं बनाने वाले कारखाने अभी भी बंद हैं। वजह है कोरोना। शहर के सबसे बड़े मूर्ति कारखाने के संचालक अतुल पाल ने बताया वे गणेश जी की पांच हजार से ज्यादा मूर्तियां बनाकर बेचते थे। पाल के यहां 25 से ज्यादा बंगाली कारीगर काम करते हैं। हर साल अब तक ढाई हजार से ज्यादा ऑर्डर आ चुके होते हैं, लेकिन इस बार दो ऑर्डर आए हैं। शहर की ज्यादातर बड़ी मूर्तियां यहीं बनती हैं। मूर्ति बनाने के लिए कानपुर से बांस, बैतूल से घास और कोलकाता से मिट्टी व शृंगार का सामान बुलाया जाता है, लेकिन इस बार लाने में और इंतजार करना पड़ेगा। बाकी के छह कारखानों के संचालक बंगाल के हैं। लॉकडाउन के दौरान सभी चले गए हैं। ऐसे में काम जून के अंतिम माह या जुलाई में ही शुरू हो पाएगा, जिससे ऑर्डर पर सप्लाय मुश्किल होगी। यहां से एमपी और राजस्थान में मूर्तियां भेजी जाती हैं।

छोटी मूर्तियों के निर्माण पर भी असर
रिवर साइड के कारखाना संचालक लक्की ठाकुर ने बताया इस बार छोटी मूर्तियां भी कम बनेंगी। इसका असर बाजार और पंडालों पर रहेगा।

डिस्टेंस तोड़ा, कई दुकानदारों ने तो मास्क तक नहीं लगाया

तेजाजी नगर थाने के पास स्थित गणेश नगर में शनिवार शाम 4 बजे नजारा देख ऐसा लगा जैसे यहां कोरोना आया ही नहीं। व्यापारियों ने पूरा बाजार खोल रखा था। भीड़ भी ऐसी टूट पड़ी कि न तो सोशल डिस्टेंसिंग दिखी न ही कोरोना को लेकर लोगों में जागरूकता। 70 दिन तक घरों में बैठने वाले ज्यादातर लोग अनलॉक होते ही बिना मास्क, ग्लव्ज के बाजारों में आ गए। इलाके में रेस्त्रां, मिठाई, बेकरी आइटम, स्टेशनरी, मोबाइल रिपेयरिंग, हार्डवेयर, कपड़ों की दुकानें खुलीं। ज्यादातर दुकानदार भी मास्क में नजर नहीं आए। ग्राहक बनकर जब मास्क नहीं पहनने वाले व्यापारियों से बात की तो उनका जवाब था- कारोबार काफी प्रभावित हो गया है। अब जो होगा देखा जाएगा। परिवार को भी तो पालना है। जब उन्हें समझाया कि कोरोना को हलके में लेना ठीक नहीं है तो कुछ व्यापारियों ने मास्क लगाने और सुरक्षा रखने की हामी भरी।

बिना मास्क और ग्लव्ज दूध, पनीर और मिठाई बेच रहे
राधा स्वामी आश्रम मार्ग के सामने वाले मार्ग पर सांवरिया डेयरी पर भारी भीड़ दिखी। यहां दुकान संचालक बेकरी आइटम के साथ दूध, पनीर और मिठाई तक बिना मास्क और ग्लव्ज के बेच रहे थे। इस दुकान पर भी भीड़ थी। मां भगवती कलेक्शन पर दुकान संचालक बिना मास्क के थे। इन्हीं के पास निधि स्टेशनरी के संचालक मास्क पहने थे।



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मूर्ति कारखाने के संचालक अतुल पाल दुर्गाजी की प्रतिमा पर रंगरोगन करते हुए।


source https://www.bhaskar.com/local/mp/indore/news/7-big-factories-in-which-statues-are-to-be-made-from-may-they-are-still-locked-127383591.html

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