इटारसी जंक्शन के प्लेटफार्म नंबर 1 के साइड ट्रैक पर खड़े 12 हजार हॉर्स पॉवर के लोकोमोटिव इंजन को इटारसी से बुधनी के बीच 30 किमी के ट्रैक पर 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलाया गया। अब इस इंजन को भोपाल भेज दिया गया है। इटारसी में इलेक्ट्रिक लोको चलाने वाले लगभग 18-20 पायलटों ने नई तकनीक से बने लोको इंजन के बारे में जाना और तकनीकी ट्रेनिंग ली। इस इंजन का उपयोग कॉरिडोर रेलवे ट्रैक पर माल की ढुलाई में होगा। यह देश का पहला सबसे हाई पॉवर लोको इंजन है। इसे दो सेक्शन में बनाया गया है। एक तरफ पायलट केबिन है जो वातानुकूलित है। इस इंजन की लंबाई 35 मीटर व वजन 180 टन है। इसकी खासियत ईंधन के बचत की है। यह इलेक्ट्रिक को री-जनरेट करता है। लोकोमोटिव में सामने स्टोन डिफ्लेक्टर लगाया गया है, जिससे कोई भी बाहरी वस्तु, पत्थर आदि टकराकर बाहर की तरफ जाता है, जिससे लोकोमोटिव को कोई डेमेज नहीं हो पाता है।
रेल अधिकारियों ने बताया इस लोकोमोटिव के केबिन को क्रू-फ्रेंडली एवं लोको पायलटों के लिए सुविधाजनक बनाया गया है। लोकोमोटिव में केंद्रीयकरण न्यूमेटिक पैनल लगाया गया है। लोको में पाइप लाइनों की संख्या अत्यंत कम है। पाइप लाइनों में आने वाली खराबियों को लोको पायलट द्वारा ढूंढना आसान होता है। लोकोमोटिव की विश्वसनीयता अधिक है क्योंकि इस लोकोमोटिव में एक मास्टर लोको है व एक स्लेव लोको है। मास्टर लोको में किसी प्रकार की खराबी आने पर स्लेव लोको के पाॅवर से कार्य किया जा सकता है। लोकोमोटिव बदलने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/hoshangabad/itarsi/news/trial-of-12-thousand-hp-loco-between-itarsi-to-budhni-127445136.html
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