Thursday, August 27, 2020

वेदांत में लापरवाही तो जिला अस्पताल में अमानवीयता; होम्योपैथी डॉक्टर कर रहा था इलाज; वेंटिलेटर खराब, मौत

अस्पताल में इलाज के दौरान महिला की मौत हो गई। परिजन ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है। रावजी बाजार थाना क्षेत्र में रहने वाले आदेश उर्फ त्रिलोक हार्डिया ने बुधवार शाम डीआईजी को बैराठी कॉलोनी स्थित वेदांत हॉस्पिटल की शिकायत की।

आदेश ने डीआईजी को बताया कि 24 जुलाई को उनकी मां को अस्पताल में भर्ती किया था। अगले दिन उनकी मौत हो गई। परिजन ने हंगामा किया तो पता चला इलाज बीएचएमएस डॉक्टर कर रहा था। अस्पताल के वीडियो फुटेज से यह भी खुलासा हुआ कि वहां वेंटिलेटर भी खराब था। उसे दो घंटे तक ठीक करने का प्रयास किया जा रहा था।

कागजों पर पिता के हस्ताक्षर, जबकि उनका 12 साल पहले निधन हो चुका
अस्पताल प्रबंधन ने आदेश के हस्ताक्षर कई जगह पर फर्जी किए हैं। मां को भर्ती करते वक्त पिता का नाम लिखा और उनकी साइन कर दी, जबकि आदेश के पिता की 12 साल पहले ही मौत हो चुकी है। परिजन का कहना है वे 12 से ज्यादा बार शिकायत कर चुके हैं। अभी तक जांच ही शुरू नहीं हुई है। इस मामले में जूनी इंदौर टीआई भरत सिंह ठाकुर का कहना है जांच चल रही है। वहीं डीआईजी हरिनारायणाचारी मिश्र ने जांच के लिए फिर से जूनी इंदौर थाने को लिखा है।

सारे आरोप बेबुनियाद हैं, हमने किसी की साइन नहीं की, वेंटिलेटर भी ठीक था
महिला के परिजन जो आरोप लगा रहे हैं वे सारे निराधार हैं। वेंटिलेटर ठीक था। महिला को जब भर्ती किया तो बेटे ने ही सारी डिटेल दी है। उसी ने भर्ती पर्ची पर साइन की है। महिला की हालत पहले से गंभीर थी। 24 घंटे तक कुछ नहीं कह सकते। मरीज को पहले ही बता दिया था। - डॉ. आशीष अग्रवाल, संचालक, वेदांत हॉस्पिटल

प्रभारी बोले- टिटनेस, रैबीज और गैंगरीन जैसी बीमारियों में पीएम नहीं
बाइक स्लिप होने से एक युवक दीवार से टकरा गया। मुंह में फ्रेक्चर आए। 15 दिन भर्ती रहने के दौरान उसे टिटनेस हो गया। बुधवार देर रात उसकी मौत हो गई। पुलिस शव का पीएम कराने जिला अस्पताल लाई। यहां मेडिकल हिस्ट्री में टिटनेस से मौत होने की पुष्टि होने के बावजूद उसका शव पोस्टमार्टम किए बिना ही सौंप दिया। छत्रीपुरा पुलिस के अनुसार सिमरोल के ग्राम बागोरा में रहने वाले 24 वर्षीय मोहन पिता गिरधारी मेड़ा की बुधवार रात को इलाज के दौरान मौत हो गई।

परिजन ने पुलिस को बताया कि वह एक फैक्टरी में काम करता था। 2 अगस्त को गांव में ही उसकी बाइक स्लिप हो गई। वह असंतुलित होकर एक दीवार से टकरा गया। उसे इंदौर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया। मुंह में दो माइनर फ्रैक्चर आने की बात सामने आई। इलाज चलता रहा। अचानक उसे टिटनेस का इन्फेक्शन फैला। आखिर उसकी मौत हो गई।

इन्फेक्शन फैलने का रहता है खतरा, इसलिए नहीं करते पीएम
पुलिस ने एमएलसी के आधार पर शव परीक्षण के लिए जिला अस्पताल पहुंचाया। पोस्टमॉर्टम इंचार्ज डॉक्टर भरत वाजपेयी का कहना है मौत टिटनेस से हुई। उसकी जांच रिपोर्ट में भी यही खुलासा हुआ है। नियमानुसार ऐसे इन्फेक्शन से हुई मौत में पोस्टमॉर्टम नहीं करना चाहिए। इससे पीएम करने वाले और बॉडी खुलने से संपर्क में आए परिजन को भी इन्फेक्शन हो सकता है, इसलिए बिना पीएम के शव परिजन को सौंप दिया है।



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मृतक मोहन


source https://www.bhaskar.com/local/mp/indore/news/negligence-in-vedanta-and-inhumanity-in-district-hospital-homeopathy-doctor-was-doing-treatment-ventilator-malfunction-death-127659691.html

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