Wednesday, August 26, 2020

सुखी जीवन का मंत्र: जो मिले उसी में सुख ढूंढ लो : आचार्यश्री प्रमुखसागर

सुखी जीवन का एक ही मंत्र है कि जो मिले उसी में सुख ढूंढ लो। धर्म कोई खराब नहीं होता जो समझ में आ जाए वह सब अच्छा है। धर्म हमें प्रेम, दया, वात्सल्य, करुणा, मैत्री और सद्भाव सिखाता है। सोच धर्म में वैभव है, सोच धर्म वस्तु से परहेज करने का धर्म है। लोक धर्म बाहर का धर्म है। हमें कई बार पड़ोसी अच्छे लगते है, यह सोच धर्म ही अनुचित है।
यह बात आचार्यश्री 108 प्रमुखसागरजी ने बुधवार को धर्मसभा में कही। उन्होंने कहा वर्तमान दौर में लोगों में लगातार तृष्णा बढ़ती जा रही है। ज्यो-ज्यों पैसा आता है, त्यों-त्यों तृष्णा कहीं ज्यादा बढ़ रही है। लोभ को हटाने के लिए हमें संतोष की प्रवृत्ति को धारण करना होगा। चातुर्मास प्रवक्ता रितेश जैन ने बताया समाजसेवी अनिल कोठारी परिवार ने दीप प्रज्जवलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। शांतिधारा का लाभ समाजसेवी सुरेश अग्रवाल ने लिया। अहिंसा तीर्थ निर्माण के लिए भूमि दानदाता समाजसेवी महावीर मादावत परिवार का सम्मान किया।



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source https://www.bhaskar.com/local/mp/ratlam/jaora/news/mantra-of-happy-life-find-happiness-in-what-you-get-acharyashree-pramukh-sagar-127656761.html

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