{स्मार्ट सिटी के प्रोजेक्ट्स के साथ कंट्रोल कमांड का मैनेजमेंट भी: स्मार्ट सिटी कार्पाेरेशन के कार्यपालन यंत्री अंकित शर्मा माता-पिता के साथ रहते हैं। वे स्मार्ट सिटी के प्राेजेक्ट देखने के साथ ही इन दिनाें कोरोना वायरस संक्रमण से बचाने आपदा प्रबंधन सेंटर पर जुटी टीम का मैनेजमेंट कर रहे हैं।
{रात 12 बजे पहुंचते हैं घर, सूचना मिलते ही फिर आ जाते हैं: सीएमएचओ की टीम के सदस्य जिला कम्यूनिटी मोबलाइजर एसएस खान काेई व्यक्ति कोरोना वायरस के संक्रमण से पीड़ित ताे नहीं, उसकी स्क्रीनिंग खुद करते हैं। उन्होंने बताया कि वे रात 12 घर पहुंचते हैं, लेकिन सूचना मिलते ही फिर आ जाते हैं।
{रात को घर पहुंचते हैं, तब मां कुंदी खोलती है: डाॅ. प्रतीक दुबे मेडिकल आॅफिसर हैं। वे आपदा नियंत्रण कक्ष में सारी व्यवस्थाओं को संभाल रहे हैं। डाॅ. दुबे सुबह 9 बजे अपने घर से निकलते हैं। रात्रि 12 बजे घर पहुंच पाते हैं। तब मां और पिता दोनों जागे हुए होते हैं। परिजन को सुरक्षित करने की कोशिश कर स्वयं काे अलग कमरे में क्वारेंटाइन कर लेते हैं।
ग्वालियर| कोरोना के प्रकोप से शहरवासियों को बचाने के लिए 24 घंटे चल रहे आपदा नियंत्रण कक्ष में काम करने वालों की दिनचर्या बदल चुकी है। डॉक्टर, इंजीनियर अाैर स्वास्थ्य विभाग में पदस्थ स्टाफ जब घर पहुंचते हैं तो आधी रात हो चुकी होती है। सुबह फिर तैयार होकर ये लोग कमान संभाल लेते हैं।
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source https://www.bhaskar.com/mp/gwalior/news/mp-news-doctors-and-engineers-are-busy-in-defeating-corona-071030-6966375.html
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