शहर में सामुदायिक और सार्वजनिक शौचालय बनाने में की गई वित्तीय अनियमितताओं का मामला तूल पकड़ गया है। निगम आयुक्त संदीप माकिन के प्रस्ताव पर 45 शौचालयों के इस मामले में प्रशासक एमबी ओझा ने अधीक्षण यंत्री और उपयंत्री की विभागीय जांच (डीई) के आदेश दिए हैं। दरअसल, स्वच्छ भारत मिशन के तहत बिना अधिकार के निगमायुक्त ने 7.54 करोड़ रुपए लागत से शाैचालय बनाने के लिए मंजूरी देकर सुलभ इंटरनेशनल को ठेका दे दिया था।
19.95 प्रतिशत अधिक दरों पर स्वीकृत किए गए इस काम की शिकायत लोकायुक्त में होने पर आनन-फानन में इस प्राेजेक्ट से जुड़े लाेगाें काे नोटिस दिए गए। इसके बाद निगमायुक्त ने अधीक्षण यंत्री एवं नोडल अधिकारी स्वच्छ भारत मिशन प्रदीप चतुर्वेदी, एई सतेंद्र यादव, सब इंजीनियर राजेश परिहार, सीसीओ ग्वालियर पूर्व प्रेम पचौरी और एक क्लर्क की विभागीय जांच करने का प्रस्ताव प्रशासक को भेजा था।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/gwalior/news/order-for-departmental-inquiry-of-deputy-engineer-and-superintending-engineer-127690658.html
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