कोरोना काल में आपदा प्रबंधन को लेकर वर्ष 2005 में बनाए गए कानून में कई ऐसे अधिकार शासन और प्रशासन को दिए गए हैं, जिनका उपयोग आपदा के दौरान जरूरतों के मुताबिक किया जा सकता है। यदि कोरोना केश बढ़ रही है और उनके इलाज के लिए आवश्यक इंतजाम नहीं हो पा रहे, तो शासन और प्रशासन इस अधिनियम की धारा 65 के तहत निजी अस्पताल का अधिग्रहण कर सकती है। धारा 65 के प्रावधानों के मुताबिक यदि आपदा प्रबंधन से संबंधित अधिकारियों को लगता है कि किसी व्यक्ति या संस्था के पास कोई संसाधन मौजूद हैं, जिनका इस्तेमाल आपदा से प्रभावित लोगों के लिए किया जाना जरूरी है तो उनका अधिग्रहण किया जा सकता है। हाल ही में प्रदेश के भोपाल, इन्दौर व उज्जैन के कुछ निजी अस्पतालों का अधिग्रहण धारा 65 के तहत ही किया गया है।
सभी की निगाहें हाईकोर्ट के फैसले पर
निजी अस्पतालों में मरीजों के इलाज के मुद्दे पर हाईकोर्ट द्वारा सुनाए जाने वाले फैसले पर लोगों की निगाहें टिकी हुईं हैं। शाजापुर के एक निजी अस्पताल में बिल की राशि जमा न करने वाले वृद्ध को बंधक बनाए जाने के मामले पर हाईकोर्ट ने एक गाइडलाइन बनाने की मंशा जताई है, ताकि पैसों के अभाव में कोई भी मरीज इलाज से वंचित न हो सके। इस मामले पर सोमवार 7 सितम्बर को सुनवाई होनी है।
मैंने हाईकोर्ट में दिए अपने सुझावों में इस बात का भी उल्लेख किया है कि कोरोना मरीजों के विशेष इलाज और देखभाल में आ रहे अतिरिक्त खर्च को वसूलना निजी अस्पतालों का जायज हक है। अब मुद््दा यह है कि क्या अतिरिक्त खर्च वसूलने के बारे में कोई अधिकतम सीमा तय की जा सकती है या नहीं और क्या शासन अथवा न्यायालय इस सम्बंध में कोई निर्देश दे सकता है। इसका निर्णय उच्च न्यायालय से ही अपेक्षित है, ताकि जन सामान्य में निजी अस्पतालों द्वारा वसूली जा रही राशि को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सके।
-नमन नागरथ, वरिष्ठ अधिवक्ता
(निजी अस्पतालों के मामले में हाईकोर्ट द्वारा बनाए गए अदालत मित्र)
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/jabalpur/news/government-can-acquire-hospitals-for-treatment-127687226.html
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