Sunday, September 20, 2020

5 लाख कर्मचारियों के इलाज के लिए 40 करोड़ का बजट यानी एक परिवार पर दवा का औसत खर्च 2.15 रुपए रोज

प्रदेश में पांच लाख कर्मचारियों के इलाज पर खर्च किए जाने का इस साल का बजट महज 40 करोड़ रुपए है। यानी प्रत्येक कर्मचारी और उसके परिवार के इलाज पर सालाना खर्च के लिए सिर्फ 800 रुपए। महीने का 66 रुपए 66 पैसे और प्रतिदिन का माने तो 2 रुपए 15 पैसे। यह खर्च कर्मचारी और उसके परिवार के सदस्यों की बीमारी का है। सरकार खुद मानती है कि यह राशि इतनी कम है जो इलाज के लिए पर्याप्त नहीं है। दरअसल, इस व्यवस्था को खत्म कर सरकार कर्मचारियों के इलाज के लिए पर्याप्त राशि मुहैया हो सके। इसके लिए कर्मचारी स्वास्थ्य बीमा योजना लागू करने जा रही है। तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में इसका खाका तैयार कर लिया गया था। वर्तमान में इसे संशोधित कर लागू किया जाना है।

मांग... इलाज की सालभर की लिमिट 10 हजार से बढ़ाकर एक लाख की जाए

  • कर्मचारियों के ओपीडी इलाज की साल भर की लिमिट 10 हजार रुपए थी जिसे बढ़ाकर 80 हजार रुपए से 1 लाख रुपए की जाए।
  • पांच साल तक इलाज के बदले में मिलने वाली क्षतिपूर्ति की योजना और बीमा योजना दोनों लागू रखी जाएं। इसमें जो भी उचित हो कर्मचारी उसका चयन करें।
  • पुलिस की तर्ज पर बीमा योजना शुरु हो, जिसमें प्रीमियम की राशि जमा करवाकर विभाग गठित कल्याण कोष में जमा करता है। इसमें बीमारी से इलाज के लिए कर्मियों को हर साल 8 लाख तक दिए जाने का प्रावधान है।

बीमा योजना को संशोधित कर लागू करना चाहती है सरकार
पूर्व में तैयार योजना के अनुसार अधिकारियों के वेतन से हर महीने स्वास्थ्य बीमा योजना में प्रीमियम राशि 1000, कर्मचारी से 500 और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से 400 रुपए हर महीने काटे जाने का प्रावधान था। इससे हर महीने प्रीमियम की जमा राशि अनुमानित 40 करोड़ थी। यानी साल भर में 480 करोड़। इसमें रिटायर होने वाले कर्मचारियों में अधिकारियों की ग्रेज्युटी राशि में से 1 लाख रुपए और कर्मचारियों से 50 हजार रुपए काटे जाना का प्रावधान था, बदले में उन्हें जीवन पर्यन्त इलाज की सुविधा दिया जाना था।

यह प्रस्ताव जब तत्कालीन सरकार के पास आया तो इसे सहर्ष स्वीकार कर लिया गया, क्योंकि इसमें सरकार का तो कोई खर्च था नहीं। उलटे उसके कर्मचारियों के इलाज में होने वाली खर्च की 40 करोड़ भी बच जाते। वर्तमान सरकार की मंशा इस योजना को संशोधित कर लागू करने की है। इसमें खास यह है कि कर्मचारियों से बीमा योजना के लिए प्रस्ताव मंगाए जा रहे हैं।

इनका कहना है...योजना में संशोधन के लिए सरकार को दिया है प्रस्ताव
कर्मचारी बीमा योजना में संशोधन के लिए प्रस्ताव दिए हैं। सरकार इनका परीक्षण कर लागू करेगी तो इससे कर्मचारियों का फायदा होगा।
सुधीर नायक, अध्यक्ष,मंत्रालय कर्मचारी संघ

कर्मचारियों से चर्चा करके लागू की जाएगी योजना
पूर्ववर्ती सरकार की प्रस्तावित बीमा योजना खारिज नहीं की गई है, उसका परीक्षण कर क्या-क्या संशोधन किए जा सकते हैं। कर्मचारियों से चर्चा कर इस योजना को लागू किया जाएगा।
इंदरसिंह परमार, सामान्य प्रशासन, राज्यमंत्री



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फाइल फोटो


source https://www.bhaskar.com/local/mp/bhopal/news/budget-of-40-crores-for-the-treatment-of-5-lakh-employees-ie-the-average-expenditure-of-medicine-on-a-family-is-rs-215-per-day-127738998.html

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