Saturday, August 22, 2020

एक ही दिन में ऐसी बारिश हुई कि शिप्रा लबालब, बड़ा पुल, किनारे के मंदिर और सड़कें डूब गईं, जल निकासी सिस्टम फेल, 50 कॉलोनियों में घुसा पानी

दो दिन तक लगातार बारिश ने भले ही 12 घंटे में गंभीर डेम को लबालब कर दिया लेकिन निचली बस्तियों और कॉलोनियों के रहवासियों के लिए यह बारिश मुसीबत बन कर टूटी। जल निकासी सिस्टम पूरी तरह फेल साबित हुआ। कई जगह गटरों का पानी घरों में घुस जाने से लोग हलाकान हो गए। इस बीच बिजली ने भी कई बार धोखा दिया। शिप्रा पांच साल बाद रौद्र रूप में दिखाई दी।
बाढ़ में बड़ा पुल भी आने से बड़नगर रोड बंद रहा। उफनाती शिप्रा किनारे की बस्तियों के लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाना पड़ा। राहत की बात यह है कि महापौर मीना जोनवाल ने कहा है कि सोमवार से शहर में फिर से रोज जलप्रदाय किया जाएगा। बारिश की खेंच के चलते नगर निगम ने 21 अगस्त से एक दिन छोड़कर जलप्रदाय शुरू किया था। ट


बड़नगर रोड का पुराना बड़ा पुल 2.30 बजे और नया 4.45 बजे डूब गए, जिससे आवागमन बंद हो गया।

इन क्षेत्रों में भी जल जमाव
डिवाइन वैली, सांईधाम नगर, तीन बत्ती, बालाजी एवेन्यू, ढांचा भवन, जवाहरनगर, साकेतनगर, नागझिरी क्षेत्र, शक्तिनगर, एमपीईबी कॉलोनी ज्योतिनगर, लक्ष्मीनगर, वसंतबिहार सेक्टर-ए, राजीवनगर सेंटपॉल के पीछे, नागेश्वरधाम, सूरजनगर, महेशनगर, मालीपुरा, दौलतगंज, नई सड़क, लाल मस्जिद, डाबरी पीठा, केडी गेट, तोपखाना, कोट मोहल्ला, बेगमबाग में जल जमाव हुआ।


गंभीर डेम के उफान पर आने के बाद शहर के लोगों का इसे देखने के लिए मजमा लगा रहा।

त्रिवेणी के पास स्थित हनुमान चालीसा से ध्यान का केंद्र शांतम बाढ़ में डूबा

इंदौर रोड पर त्रिवेणी के समीप हरियाखेड़ी मार्ग पर स्थित हनुमान चालीसा से ध्यान का केंद्र शांतम शनिवार को शिप्रा की बाढ़ में डूब गया। आश्रम के संचालक जीवन प्रबंधन गुरु पं. विजयशंकर मेहता व परिजन सहित स्टाफ को प्रशासन ने सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। आश्रम की पहली मंजिल में पानी घुस जाने से भारी नुकसान की आशंका है।
आश्रम शिप्रा के किनारे स्थित है। दो दिन से हो रही लगातार बारिश के कारण शिप्रा का जल स्तर शनिवार को बढ़ता चला गया। देखते ही देखते आश्रम की तल मंजिल में बाढ़ के पानी ने तबाही मचा दी। उस समय पं. मेहता आश्रम में ही थे। उन्होंने ऊपरी मंजिल पर पहुंच कर अपने को सुरक्षित किया तथा प्रशासन को इसकी जानकारी दी। पं. मेहता ने बताया कि पानी तेजी से बढ़ने के कारण संभलने का मौका ही नहीं मिला। इस कारण तल मंजिल पर स्थित सभी कार्यालयों, ध्यान केंद्र, यज्ञशाला, गोशाला आदि पानी में डूब गए। प्रशासन की मदद से पं. मेहता और स्टाफ को वहां से सुरक्षित निकाला गया।

नीलगंगा चौैराहा : नाला उफना

इसलिए भरा पानी : नाले का कर्व इतना कम है कि उसे उफनते देर नहीं लगती। रहवासियों ने बताया बारिश हो या न हो, नाला कई बार उफान पर आ जाता है। गंदे पानी का सड़क पर आना आम है। इसके अलावा चौराहा चारों ओर से सबसे निचले स्थान पर होने से चारों ओर का पानी वहीं आकर रुक जाता है।

गरीब नवाज कॉलोनी : जलजमाव

इसलिए भरा पानी : सीमेंट कांक्रीट सड़क बनाते वक्त कॉलाेनी की नालियों को नजरअंदाज किया गया, जिससे बारिश का पानी नालियों में बहने की जगह सीधे सड़क पर जमा हो जाता है। रहवासियों का कहना है कि बारिश में हर वक्त जल जमाव जैसी स्थिति का सामना करना पड़ता है।

इंदौर रोड से सटी शांति कॉलोनी में पानी की निकासी के लिए छोटी नालियां तो हैं लेकिन उससे कॉलोनी की जल निकासी नहीं हो पा रही है। यही कारण है कि हर बार बारिश में इस कॉलोनी में सबसे ज्यादा जल जमाव की स्थिति बनती है।

कहीं नाले चोक तो कहीं पेड़ गिरे
नीलगंगा चौराहा, नागझिरी में नाले में गाद जमा होने से ओवरफ्लो हाे गया। त्रिवेणी विहार, बसंत विहार में पानी भरा। जंतर-मंतर के पक्का पाला में पानी ओवरफ्लो। मुनिनगर, अलखधामनगर, छोटी कमल कॉलोनी, मक्सी रोड उद्योगपुरी में बालाजी तोल कांटा, अभिलाषा कॉलोनी में पानी भर गया। नानाखेड़ा, उद््यन मार्ग पर पेड़ गिर गया।



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उफनाती शिप्रा किनारे की बस्तियों के लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाना पड़ा।


source https://www.bhaskar.com/local/mp/ujjain/news/in-a-single-day-there-was-such-a-rain-that-shipra-unloaded-big-bridge-shore-temples-and-roads-were-submerged-drainage-system-failed-water-entered-in-50-colonies-127643188.html

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