मुरैना, श्योपुर, भिंड, शिवपुरी और ग्वालियर जिले के लिए सिंचाई और पीने का पानी मुहैया कराने के लिए जल संसाधन विभाग ने 552 करोड़ रुपए की माधवराव सिंधिया वृहद सिंचाई परियोजना पर काम शुरू कर दिया है। जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने इस प्रोजेक्ट के सर्वेक्षण के लिए 1.14 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। शिवराज सरकार ने यदि इस बहुआयामी प्रोजेक्ट के लिए फंडिंग समय से की तो 6 साल में 50 हजार किसानों की आजीविका मजबूत हाे जाएगी। साथ ही पीने के पानी के लिए पलायन भी बंद हो जाएगा।
चंबल व ग्वालियर संभाग के पांच जिलों को सिंचाई और पीने का पानी उपलब्ध कराने की योजना कूनो नदी पर बनाए जाने वाले कटीला बांध से जुड़ी है। बनने के बाद इस बांध में 174 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी का भंडारण किया जा सकेगा। इस प्रोजेक्ट के तहत जल संसाधन विभाग कूनो नदी के ऊपर रेनवी नदी पर भी 79 एमसीएम क्षमता का बांध तैयार करेगा।
इस बांध का पानी छोड़ने पर कूनो नदी में आएगा जहां से उसे कटीला बांध में ले जाया जा सकेगा। रेनवी नदी कटीला के ऊपर मिल रही है। रेनवी से और ऊपर चलने पर करई नदी मिलती है, इस नदी पर भी एक बांध बनाकर 89 एमसीएम पानी का भंडारण किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि कूनो नदी के डैम के पास राजस्थान के क्षेत्र में एक और साइट मिलती है, उस पर भी एक डैम का निर्माण कराने के बाद उसमें 93 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी स्टोर किया जा सकेगा। इस प्रकार कूनो नदी क्षेत्र के आसपास पानी के भंडारण के लिए कटीला डैम के अलावा छोटे-छोटे तीन डैम और बनाए जाएंगे।
100 साल बाद बनेगा संभाग में बड़ा डैम, होगा पानी का संकट कम
रियासत काल में बने बांधों के बाद से अब तक चंबल व ग्वालियर संभाग में कोई नया बड़ा बांध नहीं बना है। इसके चलते सिंचाई क्षेत्र में वृद्धि नहीं हो पा रही थी और पीने के पानी की समस्या का समाधान भी दूरस्थ इलाकों में नहीं हो पा रहा है। कूनो नदी पर बनाए जाने वाले कटीला बांध से पांच जिलों में सिंचाई संकट कम होगा और पीने के पानी की उपलब्धता भी बढ़ेगी। नए प्रोजेक्ट के सर्वेक्षण के लिए जल संसाधन विभाग के उप सचिव वीएस टेकाम ने मंगलवार को 1.14 करोड़ रुपए की स्वीकृति का पत्र प्रमुख अभियंता को जारी किया है।
डेढ़ लाख हेक्टेयर में किसानों को सिंचाई की मिलेगी सुविधा
कटीला बांध बनने के बाद मुरैना, श्योपुर, शिवपुरी, भिंड व ग्वालियर जिले की डेढ़ लाख हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई के लिए बांध का पानी मिलेगा। इसमें से 65 हजार हेक्टेयर जमीन मुरैना जिले की सिंचित होगी। 85 हजार हेक्टेयर जमीन को सिंचाई के लिए ग्वालियर जिले में बांध का पानी उपलब्ध कराया जाएगा।
बांध बनने से यह होंगे तीन फायदे
1. चंबल और ग्वालियर संभाग के पांच जिलों की डेढ़ लाख हेक्टेयर जमीन को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा। पोहरी, कराहल व बैराड़ इलाके के लिए पीने का पानी भी मुहैया कराया जाएगा।
2. बारिश के सीजन में चंबल की बाढ़ को रोका जा सकेगा क्योंकि अन्य नदियों का पानी चंबल में पहुंचने के बाद बाढ़ के हालात बनते हैं। 600 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी को जरूरत पड़ने पर ही चंबल में छोड़ा जाएगा।
3. कटीला बांध के ऊपर रेनवी व करई नदी पर बनाए जाने वाले बांधों से जल संसाधन विभाग बिजली बनाएगा। इससे आसपास के गांवों को निर्बाध बिजली मिल सकेगी।
सर्वेक्षण के लिए 1.14 करोड़ मंजूर
600 मिलियन क्यूबिक मीटर क्षमता की वृहद सिंचाई परियोजना के सर्वेक्षण के लिए शासन ने 25 अगस्त को 1.14 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। डीपीआर तैयार होने के बाद 552 करोड़ रुपए की मंजूरी के बाद इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो सकेगा।
आरपी झा, अधीक्षण यंत्री, जल संसाधन ग्वालियर
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/gwalior/morena/news/3-small-dams-will-be-built-nearby-along-with-a-large-dam-on-the-river-kuno-15-lakh-hectares-of-land-can-be-irrigated-in-5-districts-drinking-water-will-also-be-provided-127656709.html
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