जिला मुख्यालय से 18 किमी दूर जैन तीर्थ स्थल ऊन के नारायण कुंड में मनरेगा में चल रहे काम के दौरान खुदाई में जैन तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा मिली है। जिला पुरातत्व संग्रहालय अधिकारी सुलतान सिंह ने बताया कि यह प्रतिमा परमार कालीन है। संभवतः किसी मंदिर की प्रतिमा होगी, जो मंदिरों के आले (ताक) में स्थापित की जाती है। चूंकि ऊन जैन शिक्षा केंद्र का बड़ा केंद्र रहा है। जैन तीर्थंकर की यह प्रतिमा क्षरित प्रतिमा हैं। इस प्रतिमा में परिचायकों का भी अंकन किया गया है। परमारकाल 1200 साल पुराना माना गया है। इसलिए अधिकतम इतनी ही पुरानी हो सकती है। यहां जैन तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी व शांतिनाथ भगवान के प्राचीन मंदिर हैं। देशभर से जैन अनुयायी शामिल होते हैं।
नारायण कुंड में नाला सुधार में मिली प्रतिमा
जनपद पंचायत सीईओ राजेंद्र शर्मा ने बताया कि ऊन के नारायण कुंड में मनरेगा में नाला सुधार कार्यक्रम चल रहा था। 120 मजदूर खुदाई के काम कर रहे थे। खुदाई में लगभग 3 फीट की जैन प्रतिमा मिली। इस संबंध में पुरातत्व विभाग को सूचना दी गई। प्रतिमा जनपद कार्यालय में रखी गई है।
800-1200 साल पुरानी प्रतिमा
परमार मध्यकालीन भारत का एक अग्निवंशी क्षत्रिय राजवंश था। इस राजवंश का अधिकार धार-मालवा-उज्जयिनी-आबू पर्वत और सिंधु के निकट अमरकोट आदि राज्यों तक फैला हुआ था। लगभग संपूर्ण पश्चिमी भारत में परमार वंश का साम्राज्य था। परमार राजाओं ने आठवीं से 14वीं शताब्दी तक शासन किया।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/khandwa/khargone/news/statue-of-the-god-parshwanath-found-in-excavation-in-mnrega-127371736.html
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