Sunday, June 21, 2020

पिता के सपनों को साकार कर डॉक्टर बनी शहर की बेटी

घर की आर्थिक स्थिति से परेशान होकर डॉक्टर बनने का सपना छोड़ने वाले एक पिता के सपनों को पंख देकर पूरा किया उसकी बेटी ने। वह भी उस समय जब देश को सबसे ज्यादा डॉक्टरों की जरूरत है।
वजीरपुरा के पुरुषोत्तम कोटवानी को 18 जून को बड़ी खुशी मिली जब उनकी तीसरे नंबर की बेटी सेजल ने सपने को पूरा कर दिया। उसने एमडी की पीजी एंट्रेंस परीक्षा में छठे नंबर पर जगह बना ली। अब दिल्ली का एम्स कॉलेज मिला है, जहां 3 वर्ष प्रैक्टिस और पढ़ाई कर कोरोना संक्रमितों का भी इलाज करेगी। महामारी के तनाव में एंट्रेंस परीक्षा उन्होंने 11 जून को ऑनलाइन इंदौर में दी थी। उन्होंने एमबीबीएस भी 72 प्रतिशत के साथ इंदौर के एमजीएम कॉलेज से इसी साल मार्च में पूरा किया है। रविवार को भी जवाहरलाल इंस्टीट्यूट मेडिकल रिसर्च सेंटर पांडुचेरी के लिए परीक्षा दी है।
घर चलाने के लिए पढ़ाई छोड़ी- शहर के श्रीराम मार्केट में सर्राफा के पास छोटा चौक में कपड़े की दुकान संचालित करने वाले पुरुषोत्तम बताते हैं वह छह भाई-बहनों में सबसे छोटे थे। आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने से पढ़ने और डॉक्टर बनने की इच्छा छोड़ दी और तब से ही दुकान संचालित करने लग गए। उनकी इच्छा को उन्होंने बेटी सेजल को 2010 में बताया था। उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था कि उनकी बेटी ये कर सकती है।

माता-पिता की इच्छा से इरादा शहर में ही सेवा करने का
केंद्रीय विद्यालय से 10वीं पास सेजल बताती हैं कि कोटा से मेडिकल कॉलेज की परीक्षा देने के लिए ट्यूशन की थी और 11-12वीं महाऋषि स्कूल से बाॅयो से की थी। घर में वही सबसे ज्यादा पढ़ी हैं और बड़ी बहन हेमलता एमएससी किया तथा भाई रूनीत 10वीं पढ़ रहा है। सेजल एमडी का पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद दिल्ली के एम्स से आकर शहर के लोगों के लिए ही सेवा देना चाहेंगी, क्योंकि माता-पिता की इच्छा है।



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The city daughter becomes a doctor after realizing father's dreams


source https://www.bhaskar.com/local/mp/ujjain/shajapur/news/the-city-daughter-becomes-a-doctor-after-realizing-fathers-dreams-127434760.html

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