बारिश की खेंच ने अब किसानों की चिंता बढ़ा दी है। कपास और सोयाबीन अंकुरित हो गई है, लेकिन सिंचाई के साधन नहीं होने से किसान अब लोटे और डिब्बों से सिंचाई करने को मजबूर हो गए है। बारिश की खेंच ऐसी ही रही तो दोबारा बोवनी की नौबत आ सकती है।
किसानों को बेसब्री से अच्छी बारिश का इंतजार है लेकिन मौसम बार-बार बदलने के बाद भी मेहरबान नहीं हो रहा है। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। जबकि दो सप्ताह पहले बारिश होने से यह उम्मीद लग रही थी कि बार जल्द ही बोवनी हो जाएगी। अधिकांश किसानों ने दो सप्ताह पहले रुक-रुककर हो रही बारिश में ही बोवनी कर दी थी तो कुछ किसान अब बोवनी कर रहे हैं।
दो सप्ताह पहले जिले में हुई तेज बारिश को देखते हुए किसानों ने उत्साह के साथ बोवनी की थी। जबकि कुछ किसान ने मौसम का मिजाज देखकर बोवनी रोक दी है। उनका कहना है अब मानसून की तेज बारिश होने पर ही बोवनी करेंगे। इससे खेतों में भी पर्याप्त नमी आ जाएगी। हालांकि किसानों को कृषि विभाग ने पर्याप्त नमी आने पर ही बोवनी करने की सलाह दी थी लेकिन अधिकांश किसानों ने सलाह नहीं मानी और बोवनी में जुट गए थे। अंबाड़ा में करीब हफ्तेभर से बारिश नहीं हुई। जबकि दो सप्ताह पहले रुक-रुककर हुई बारिश के बाद अंबाड़ा सहित जिले में कई किसानों ने बोवनी शुरू कर दी थी। बारिश की खेंच से अब उनकी चिंता बढ़ने लगी है। अंबाड़ा क्षेत्र के किसान अशोक पाटील ने बताया 65 से 70 प्रतिशत बोवनी कर चुके हैं। अब 30 से 40 प्रतिशत की बोवनी ही बाकी हैं। अब तो बीजों में अंकुरण भी फूटने लगे हैं लेकिन सात दिन से बारिश नहीं होने के कारण फसल पर बुरा असर पड़ रहा है। तेज धूप और गर्मी के कारण अंकुरण जलने लगे हैं। इन्हें बचाने के लिए किसान गिलास और लोटे से पानी डालकर फसल को सींच रहे हैं।
यह है हालात
- इस बार कपास और सोयाबीन का रकबा ज्यादा है। ज्वार, उड़द, मूंग, तुअर का रकबा कम है। इस बार बारिश से किसानों को बोई गई फसलें जल्द अंकुरित होने और बोवनी अच्छी तरह जमने की उम्मीद थी लेकिन बारिश की खेंच ने उन्हें अब परेशानी में डाल दिया है।
- किसानों ने कहा- कपास ओर सोयाबीन की सूख रही है। दोबारा बोवनी के हालात बने तो इसके लिए कई किसानों को कर्ज तक लेना पड़ सकता है।
- अंबाड़ा, हिंगना, लिंगा, देवरी, शंकारपुराकला, सारोला, उमरदा, महलगुराड़ा, सांडसकला, डवालीखुर्द, डवालीकला, नावथा, सोनूद सहित गांवों में यह हालात हैं।
अंकुरण बचाने के लिए पंप से पानी छिड़क रहेे
अंबाड़ा, सारोला सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश किसान दवा के पंप से अंकुरण पर पानी का छिड़काव कर रहे हैं। कुछ किसानों के पास सूखे की जमीन है। वह सिंचाई के लिए दूसराें से पानी ले रहे हैं। वहीं एक समस्या यह है कि ऐसे में फसल में से एक तिहाई मुनाफा किसान को देना पड़ता है। जिले में 64 हजार किसान हैं, जबकि 1 लाख 64 हैक्टेयर रकबा है। अब इन किसानों की फसल को लेकर चिंता बढ़ गई है।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/khandwa/burhanpur/news/no-rain-fear-of-burning-of-sprouted-crop-lottery-and-cartons-are-being-irrigated-127455384.html
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