काेराेना के खाैफ के दाैर में बेसहारा मरीजाें के लिए काेराेना याेद्धा किसी अवतार से कम नहीं हैं। ऐसा ही एक मामला बुधवार काे अनुकूल नगर में हुआ।
क्षेत्र में सर्वे कर रहीं आशा कार्यकर्ता संगीता परसानिया विकास परमार के मकान पर पहुंचीं, यहां एक महिला अपने कमरे में लेटी थी। आवाज दी ताे किसी ने सुना नहीं। कमरे में पलंग पर महिला राेती दिखी। आशा कार्यकर्ता ने देखा कि बुजुर्ग महिला बीमार है और बोलने में असमर्थ है। उन्हाेंने कोरोना योद्धा आशा कार्यकर्ता सुनीता पांचाल काे सूचना दी। तो पांचाल भी पहुंचीं। उन्होंने जिला अस्पताल में फोन कर बुजुर्ग बीमार महिला की जानकारी दी। यह भी बताया कि अकेली रहती हैं। सूचना के करीब 25 मिनट बाद स्वास्थ्य परीक्षण करने के लिए एक टीम पहुंची। उन्होंने दूर से ही हालत देखी और अपने अधिकारी को बोला सीरियस केस है, एंबुलेंस भेजो। बिना चेक किए वापस आ गए। आधे घंटे बाद एंबुलेंस पहुंची। एंबुलेंस के चालक ने बुजुर्ग महिला की हालत देख कर उठा कर वाहन में डालने से मना कर दिया। आशा कार्यकर्ता सुनीता और संगीता ने सुरक्षा उपाय करते हुए बुजुर्ग महिला शकुंतला पति रेवाराम काे चादर सहित उठाया और एंबुलेंस में रख कर जिला अस्पताल पहुंचाया। महिला किराये से रहती हैं। एक बेटा है जो गांव में रहता है। पति की मौत हो चुकी है। उनकी ऐसी हालत के बावजूद माेहल्ले के किसी भी व्यक्ति ने पास आने की हिम्मत नहीं दिखाई। काेराेना याेद्धाओं ने अस्पताल पहुंचाया।
डीसीएम ओपी मालवीय ने बताया मुझे मालूम पड़ा कि दो आशा कार्यकर्ताओं ने बुजुर्ग बीमार महिला को एंबुलेंस में रखा। जिला अस्पताल से वार्डबाॅय को जाना चाहिए था। हमारी आशा कार्यकर्ताओं का तो सर्वे और सूचना देने का काम है पर वे महिला का कष्ट नहीं देख पाई।
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source https://www.bhaskar.com/local/mp/indore/dewas/news/an-elderly-woman-came-home-sick-ambulance-came-but-the-driver-said-we-will-not-lift-asha-workers-picked-up-the-sheet-and-placed-it-in-the-vehicle-127299591.html
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