द माय धक्को द कोठी फोड़ी द, कोठी मनी होय तो कंणगो फोड़ी द...’ अर्थात हे मां देना हो तो दें। कोठी फोड़कर दें, कोठी में नहीं हो तो कंगना फोड़कर दें। हे मां हमें अनाज के कुछ दाने दें। वो दाने ही हमारे लिए बहुत होंगे। निमाड़ का पारंपरिक त्योहार डोडबलई (मेंढक) जेष्ठ की अमावस्या पर शुक्रवार को शहर के साथ ही जिले के गांवों में मनाया गया। अच्छी वर्षा की कामना को लेकर बच्चों ने शरीर पर पलाश या नीम की पत्तियां बांधी और डेडर (मेंढक) बनकर लोगों से पानी मांगा। हंसते-गाते हुए घर-घर पहुंचे और निमाड़ी बोली में यह गीत गाकर लोगों से पानी और अनाज मांगा। इसके बाद खेतों में या गांव से बाहर भोजन बनाया। इंद्र देव से अच्छी बारिश की कामना की और पलाश के पत्तों पर भोजन ग्रहण किया।
वर्षा के आगमन के उपलक्ष्य में मनाते हैं यह त्योहार : लोक कलाकार साधना उपाध्याय ने बताया जेष्ठ वर्षा के आह्वान का महीना है। गर्मी के बावजूद इन्ही दिनों पेड़ों में पानी चढ़ने लगता है और सूखे पलाश में भी हरे पत्ते फूट आते हैं। किसान वर्षा के आगमन के उपलक्ष्य में जेष्ठ की अमावस्या के दिन यह त्योहार मनाते हैं। मेंढक बारिश के सूचक होते हैं। बारिश के लिए मेंढकों की व्याकुलता और वर्षा के बाद मेंढकों में आनंद से बढ़कर और कोई दूसरा जीव नहीं होता है। इसलिए इस दिन गांवों में किसानों के बच्चे इकठ्ठा होकर एक बच्चे को पलाश के हरे पत्तों से ढंककर मेंढक का स्वरूप देते हैं और उसके कमर में रस्सी बांधकर दूसरे लड़के आगे और पीछे की ओर धक्का देते हुए टोलियां बनाकर गांव में घूमते हैं। इधर सुहागन महिलाओं ने वट सावित्री व्रत रख पति की लंबी उम्र की कामना की।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
source https://www.bhaskar.com/local/mp/khandwa/news/the-my-dhakko-the-kothi-phodi-the-127329548.html
No comments:
Post a Comment