पिछले साल 5 अप्रैल की रात लगी नरवाई की अाग से पांजरा निमासाड़िया के 10 मासूम लाेगाें की जान चली गई थी। प्रशासन ने सख्त नियम बनाए लेकिन इस साल भी उनका पालन नहीं हाे रहा है। न कुछ बदलाव नजर अा रहा है। खेताें में खुलेअाम बिना अग्निशमक यंत्र के हार्वेस्टर चल रहे हैं, किसान खेताें में भूसा मशीन चला रहे हैं। अब किसान मूंग की फसल के लिए नरवाई जलाने की तैयारी में हैं। आए दिन खेतों में आग लग रही है।
16 गांवों में लगी थी आग
पिछले साल जिले में 16 गांव में अाग से 384 किसानाें के खते जल गए थे। वहीं नरवाई की भीषण आग के कारण पांजरा के 10 लाेगाें काे जान गवानी पड़ी थी। पतलई के छतरसिंह राजपूत ने तवा की नहराें से पानी छूट गया है। किसान खेताें काे जल्दी से जल्दी तैयार करने के लिए गेहूं की नरवाई जला रहे हैं। पंचायताें काे गांवाें निगरानी तेज करनी चाहिए।
होशंगाबाद| प्रतिबंध के बाद भी दिन में भूसा बनाने की मशीनें चल रही हैं।
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source https://www.bhaskar.com/mp/hoshangabad/news/mp-news-panjra-fire-completes-one-year-even-after-rake-farmers-running-straw-machine-in-day-burning-fire-071618-6992030.html
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