सिटी रिपाेर्टर . ग्वालियर
ग्वालियर के ऐतिहासिक किले की पूर्व दिशा में विशाल दो मंदिर हैं। यह दोनों ही मंदिर करीब 1000 साल पुराने हैं। उस समय इन मंदिरों का निर्माण कच्छपघात राजवंश के राजा महिपाल ने 11वीं शताब्दी में कराया था। यह दोनों ही मंदिर विष्णुजी को समर्पित थे, इसलिए इनका नाम सहस्त्रबाहु मंदिर रखा गया, लेकिन समय के साथ इन मंदिरों को लोग सास-बहू मंदिर कहने लगे। भारतीय पर्यटन एवं यात्रा प्रबंध संस्थान के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. चंद्रशेखर बरुआ का कहना है कि इन मंदिरों का निर्माण उत्तर भारत की नागर शैली में कराया गया था। इसलिए इसमें सुंदर नक्काशी और कंगूरे और देवताओं की मूर्तियां देखने को मिलती हैं। इस मंदिर का निर्माण 5 भागों में किया गया था। इसमें अर्द्ध मंडप, मंडप, महा मंडप, अंतराल और गर्भगृह हैं। इसमें त्रिदेव की मूर्तियां भी हैं। इनमें प्रभु ब्रह्मा, विष्णु और महेश शामिल है। दरवाजे दोनों तरफ दो द्वारपाल की भी मूर्तियां बनाई गई हैं। इनको जय और विजय कहा जाता है। यह ऐसा मंदिर है, जहां गंगा और यमुना की भी मूर्तियां भी बनी हुई हैं।
सहस्त्रबाहु मंदिर के जीर्ण-शीर्ण अवस्था का यह फोटो 1881 केे पहले का है।
नागर शैली की खासियत: नागर शैली उत्तर भारतीय हिंदू स्थापत्य कला की एक शैली है। वास्तुशास्त्र के अनुसार नागर शैली के मंदिरों की पहचान आधार से लेकर सर्वोच्च अंश तक इसका चतुष्कोण होना है। मंदिर के सबसे ऊपर शिखर होता है, जिसे रेखा शिखर कहते हैं। मंदिर में दो भवन भी होते हैं, एक गर्भगृह और दूसरा मंडप। गर्भगृह ऊंचा होता है और मंडप छोटा होता है। गर्भगृह के ऊपर एक घंटाकार संरचना होती है, जिससे मंदिर की ऊंचाई बढ़ जाती है।**
सदी के महानायक भी कर चुके हैं जिक्र: इन मंदिरों की ख्याति का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि सदी के महानायक अमिताभ बच्चन भी इसका जिक्र कर चुके हैं। छोटे पर्दे पर प्रसारित होने वाले एक शो के संबंध में उन्होंने इन मंदिरों की जुड़ी जानकारी देने के लिए ट्वीट किया था। इसमें अमिताभ बच्चन ने लिखा था कि मध्यप्रदेश का एक हजार साल पुराना सास-बहू मंदिर आकर्षित करता है। साथ ही इसको मैं हेरिटेज मैप पर भी पिन कर रहा हूं, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग इसे देखें।**
1881 में हुआ था जीर्णोद्वार:
देखरेख के अभाव में इस मंदिर का एक बड़ा हिस्सा गिर गया था। अंग्रेज शासकों ने जब इसे जीर्ण-शीर्ण देखा तो वर्ष 1881 में ब्रिटिश आर्किटेक्ट मेजर जेबी कीथ से इसका रेनोवेशन कराया। इसके लिए उन्होंने इसके पुराने नक्शे का सहारा लिया। 1958 में इसे भारतीय पुरातत्व विभाग के अधीन आ गया।
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source https://www.bhaskar.com/mp/gwalior/news/mp-news-a-thousand-years-ago-this-temple-built-in-the-nagara-style-sculptures-of-ganga-and-yamuna-was-named-sahastrabahu-people-say-the-mother-in-law39s-temple-071533-6984269.html
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