Friday, April 3, 2020

अभिभावकों का सीएम और कलेक्टर को पत्र, अप्रैल की फीस माफ हो


कोरोना संक्रमण की वजह से अप्रैल माह में स्कूल 15 दिन तक नहीं लग सकेंगे। जबकि लॉक डाउन की वजह से बच्चों के अभिभावकों का रोजगार भी लगभग एक माह पटरी पर नहीं आ पाएगा। ऐसे में वह अपने बच्चों की स्कूल की फीस कैसे भरेंगे जबकि प्राइवेट स्कूलों में लॉकडाउन खुलते ही फीस भरे जाने की जल्दी की जाएगी। ऐसे में अभिभावक परेशान होंगे। इसलिए अब फीस जुलाई माह में ली जाए। इस आशय के पत्र कुछ अभिभावकों ने कलेक्टर और मुख्यमंत्री तक पत्र पहुंचाए हैं। वहीं स्कूल संचालकाें ने इस मामले में अपना पक्ष अफसराें तक पहुंचाया है कि उन्हें शिक्षकों और स्टाफ का वेतन देना है इसलिए फीस लेना मजबूरी है। विधायक प्रवीण पाठक तथा एनएसयूआई के पदाधिकारियों ने भी इस संंबंध में मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है।

उल्लेखनीय है कि 20 मार्च से स्कूलों का अवकाश घोषित कर दिया गया था, जिन छात्रों की परीक्षा नहीं हो पा रही थीं उन्हें जनरल प्रमोशन दे दिया गया था, इसके साथ ही परीक्षाएं भी स्थगित कर दी गई थीं तथा 14 अप्रैल तक का अवकाश भी घाेषित कर दिया गया था। स्कूलों का नया शिक्षण सत्र 1 अप्रैल से शुरू होता है, इस बार शिक्षण सत्र तो शुरू नहीं हुआ लेकिन प्राइवेट और सरकारी स्कूलों ने ऑनलाइन स्टडी मटेरियल भेजना शुरू कर दिया है। इसके साथ ही कुछ प्राइवेट स्कूलों ने अभिभावकों से नए सत्र के लिए फीस की मांग भी शुरू कर दी है। इस मामले में अभिभावकों की मांग के साथ-साथ विधायक प्रवीण पाठक ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मांग की है कि शासकीय और अशासकीय स्कूलों की 3 माह की फीस माफ कर दी जाए। अभिभावक देवेंद्र सिंह का कहना है कि उनका बेटा कक्षा 1 में अध्ययनरत है, वह ठेकेदारी करते हैं काम पिछले कुछ दिन से बंद है इसलिए फिलहाल फीस नहीं ली जाए। इसके लिए उन्होंने कलेक्टर को पत्र भी लिखा है। वहीं डीईओ विकास जोशी का कहना है कि इस संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग से कोई दिशा-निर्देश नहीं मिले हैं।

फैक्टरियों में काम बंद है ऐसे में हम वेतन नहीं दे सकते


-सोबरन सिंह, अध्यक्ष, बाराघाटा औद्योगिक क्षेत्र, ग्वालियर

ईएसअाईएस व पीएफ विभाग से वेतन देने की मांग की है


-सुदीप शर्मा, अध्यक्ष, बानमोर
औद्योगिक क्षेत्र, मुरैना

ईएसआईएस मेडिकल सुविधाओं के लिए है न कि वेतन देने के लिए

ईएसआईएस के रिटायर्ड मेडिकल अधीक्षक डॉ.अारके शुक्ला बताते हैं कि ईएसआईएस में जो पैसा जमा होता है, वह कर्मचारियों को मेडिकल सुविधाओं के लिए रखा जाता है। ऐसा कोई इमरजेंसी फंड नहीं है, जहां से कर्मचारियों को वेतन दिया जा सके। वेतन तो फैक्टरी संचालकों को खुद ही देना होगा।

केंद्र और राज्य सरकार के निर्देश के बाद भी फैक्टरी मालिकाें ने वेतन रोका

{ फैक्टरी संचालक ईएसआईएस और पीएफ कार्यालय से कर रहे मजदूराें काे अप्रैल-मई की सैलरी देने की मांग

ग्वालियर| केंद्र और राज्य सरकार ने फैक्टरी संचालकों से अनुरोध किया कि वे काेराेना वायरस संकट के दाैरान किसी भी मजदूर व कर्मचारी को न ताे नौकरी से निकालें अाैर न ही उनका वेतन रोकें। राज्य के श्रम विभाग ने बाकायदा इस संबंध में आदेश भी जारी किया लेकिन इस आदेश का पालन अधिकतर फैक्टरी संचालकों ने नहीं किया। बानमोर, बाराघाटा, तानसेन नगर औद्योगिक क्षेत्र के अधिकतर फैक्टरी संचालकों ने अपने यहां काम करने वाले मजदूरों और कर्मचारियों को वेतन नहीं दिया है। अब अप्रैल-मई माह की सैलरी के लिए भी वे ईएसआईएस और पीएफ विभाग को पत्र लिखकर अनुरोध कर रहे हैं कि उक्त दोनों माह का वेतन ये विभाग ही इनके मजदूरों और कर्मचारियों को दें।



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source https://www.bhaskar.com/mp/gwalior/news/mp-news-guardians-letter-to-cm-and-collector-april-fees-waived-071021-6966373.html

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