प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 21 दिन के लाॅकडाउन को सफल बनाने की कला ग्वालियर को पहले से ही आती है। 1918 के बाद ठीक 39 साल बाद यानि वर्ष 1957 में शहर को एक बार इन्फ्लूएंजा के कारण ही फिर से लाॅकडाउन का सामना करना पड़ा था। बीमारी के पुराने इतिहास को देखते हुए लॉकडाउन के आदेश जारी किए थे। शहर की सड़कों पर कर्फ्यू जैसे हालात बन गए थे। बीमारी से निपटने के लिए लोगाें ने स्वेच्छा से घरों में रहना मंजूर किया था। इस दौरान जिले में 23634 लोेग इस बीमारी का शिकार हुए थे लेकिन किसी की भी मौत नहीं हुई थी। तत्कालीन प्रशासन ने एक माह के लिए लोगों का घर से निकलना बंद करा दिया था। इस दौरान सिनेमाघर, स्कूल, कॉलेज बंद कर दिए गए थे।
(नोट: खबर के तथ्य इतिहासकार लाल बहादुर सिंह से बातचीत पर आधारित हैं।)
लॉकडाउन के दौरान सूना पड़ा मोतीमहल रोड।
लाख थी उस समय शहर की जनसंख्या
3.18
में हुअा था पहला लॉकडाउन
1957
में दूसरी बार किया गया लॉकडाउन
124 साल पहले हुआ था एंटी लॉकडाउन
ग्वालियर में लॉकडाउन के अलावा एंटी लॉकडाउन भी हो चुका है। 124 साल पहले गिल्टीदार प्लेग के चलते लोगों को घर के बाहर रहने की सलाह दी गई थी। इस बीमारी से रियासत में वर्ष 1896-97 में 241 की मृत्यु हो गई थी। जैसे ही इस बीमारी मुरार के रेजीडेंसी क्षेत्र के लोगों की मौत हुई तब रेजीडेंसी सर्जन ने लोगों को अपने घर के बजाए खुले में रहने की सलाह दी। लोगों ने इस आदेश का अक्षरश: पालन किया। सतर्कता और सही समय पर इलाज के चलते बीमारी को फैलने से रोका जा सका। बाद में इसके टीके तैयार कर लोगों को लगाए गए।
इन तरीकों ने बचाया था हमें
} इन्फ्लूएंजा की बीमारी से बचने के लिए लोगों ने रिश्तेदारों के यहां आना-जाना बंद कर दिया था।
} सीमाएं सील होने से व्यापारियों का शहर से बाहर आना-जाना बंद हो गया था।
} साप्ताहिक हाट बंद कर दी गई थी।
} गरम पानी का जमकर इस्तेमाल हुआ। साफ-सफाई की बेहतर व्यवस्था के कारण जनहानि नहीं हुई।
} उस समय पढ़े लिखे युवाओं ने नागरिकों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाया हुआ था।
} मास्क और सेनेटाइटजर नहीं थे, लेकिन लोग फिटकरी और नीम जैसे प्राकृतिक साधनों से खुद काे स्वच्छ रखते थे।
} लोग कीटाणुओं से बचने के लिए चेहरे पर साफी बांधकर निकलते थे।
ग्वालियर को लाॅकडाउन सफल करना आता है। 102 साल पहले मतलब वर्ष 1918 में इन्फ्लूएंजा नाम की बीमारी के कारण ग्वालियर में एक माह का लाॅकडाउन हुआ था। तब इस बीमारी की दवा नहीं थी इसलिए शहर की सीमाएं सील कर दी गई थीं। संक्रमित व बीमारों को अलग रखा गया था। डाॅक्टर व वैद्य दवा के साथ तीमारदारी का तरीका बताते थे। बीमारी का फैलाव रोकने के लिए शहर के सारे बाजार व शिक्षण संस्थान बंद कर दिए गए थे। गजेटियर में भी इसका उल्लेख है।
_photocaption_कोरोना से पहले इन्फ्लूएंजा, मलेरिया जैसी कई गंभीर बीमारियों को मात दे चुका है ग्वालियर*photocaption*
histry
DB Star
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source https://www.bhaskar.com/mp/gwalior/news/mp-news-102-years-ago-there-has-been-a-lockdown-070635-6913991.html
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