Monday, February 3, 2020

भोपाल में दो नगर निगम का मामला अटकने से पूरे प्रदेश में 15 तक नहीं हो पाएगा महापौर आरक्षण

भोपाल .भोपाल शहर को दो नगर निगम में बांटने का मामला अधर में होने से पूरे प्रदेश में महापौर और नगरपालिका अध्यक्ष के लिए 15 फरवरी तक होने वाला आरक्षण टलना तय है। ऐसे में अप्रैल या मई में संभावित चुनाव और आगे बढ़ सकते हैं। भोपाल में जब तक यह तय नहीं हो जाता कि शहर में दो नगर निगम होंगे या नहीं, तब तक वार्डों की सीमा का निर्धारण नहीं हो सकता। वार्डों का परिसीमन होने के बाद मतदाता सूची बनेगी, उसके बाद ही चुनाव हो पाएंगे।


प्रदेश के ज्यादातर नगरीय निकायों का कार्यकाल पूरा हो गया है। भोपाल और इंदौर नगर निगम का कार्यकाल भी 18 फरवरी को समाप्त हो रहा है। अन्य निकायों की तरह यहां भी संभागायुक्त को प्रशासक का कार्यभार सौंपे जाने की संभावना है। हालांकि एक प्रस्ताव नेताओं की एक समिति के गठन का भी है। लेकिन इस पर सहमति नहीं बन पा रही है।

एक साथ होगा पूरे प्रदेश में महापौर का आरक्षण

महापौर और नगरपालिका अध्यक्ष के लिए आरक्षण पूरे प्रदेश में एक साथ होता है। वजह यह कि महापौर और नपाध्यक्ष के आरक्षण में प्रदेश के निकायों की आबादी को आधार बनाया जाता है। जब तक यह तय नहीं हो जाता कि भोपाल में कितने नगर निगम होंगे, तब तक उनकी आबादी का निर्धारण नहीं हो सकता।

पहले भी टल चुका है आरक्षण-नगरीय आवास एवं विकास विभाग ने 2018 के विस चुनाव से पहले ही नगरीय निकायों के आरक्षण का कार्यक्रम घोषित कर दिया था। लेकिन आचार संहिता के कारण चुनाव आयोग ने इसे रोक दिया। इसके बाद विभाग ने नया कार्यक्रम घोषित किया था। इसमें 15 फरवरी तक महापौर और नपा अध्यक्ष का आरक्षण होना था। सूत्र बताते हैं कि इस आरक्षण को एक महीने यानी 15 मार्च तक के लिए टाला जा रहा है।

दो निगम को लेकर कोर्ट में केस लंबित
दो नगर निगम गठन को लेकर भाजपा से जुड़े विकास बोंदरिया व सत्यार्थ अग्रवाल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी। करीब 35 अन्य निकायों में भी वार्डों की सीमा के निर्धारण को लेकर हाईकोर्ट में याचिकाएं लंबित हैं।

निर्णय नहीं होने से नेताओं में घबराहट
दो नगर निगम पर निर्णय नहीं होने से कांग्रेस नेताओं में घबराहट की स्थिति है। महापौर और पार्षद के दावेदार नेताओं को यह समझ नहीं आ रहा कि वे चुनाव की तैयारी कैसे करें?

परिषद बैठक पर भी संशय
भोपाल में निगम परिषद की बैठक पर भी संशय की स्थिति है। तय समयसीमा के मुताबिक नवंबर में बैठक होना थी। लेकिन यह टल गई।

प्रशासक का प्रभार सौंपने को कलेक्टर अधिकृत

इधर राज्य शासन ने प्रशासनिक सुविधा के दृष्टिगत अनुविभाग मुख्यालय से अन्यत्र निकायों में प्रशासक का प्रभार तहसीलदार को सौंपने के लिए कलेक्टर को अधिकृत किया है। गाैरतलब है कि अनुविभागों में एक से अधिक नगरीय निकाय होने के कारण अनुविभागीय अधिकारी पर एक से अधिक निकायों के प्रशासक का प्रभार है।

नई तारीख घोषित करेंगे



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प्रतीकात्मक फोटो।


source https://www.bhaskar.com/mp/bhopal/news/due-to-the-matter-of-two-municipal-corporations-in-bhopal-mayors-reservation-will-not-be-available-in-the-entire-state-till-15-126664114.html

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