Wednesday, January 15, 2020

बरसात से एमपी में देशी चना को नुकसान का खतरा

नई दिल्ली| एमपी में फसल पहले आती है तथा बादल व बरसात रुक-रुककर आने से चना सहित सभी दलहनी फसलों को नुकसान का खतरा बढ़ गया है। जबकि राजस्थान में अभी तक नुकसान नहीं है, लेकिन लगातार बादल रहने पर फली में कीड़े लग जाएंगे।

मध्य प्रदेश के ग्वालियर, रतलाम से लेकर भोपाल, बीनागंज, इंदौर लाइन में बादल व बरसात से चने की तैयार होने वाली फली में कीड़े लगने का खतरा बढ़ गया है। अत: रुक-रुककर इसी तरह मौसम रहा तो वहां बोई हुई फसल की उत्पादकता 18 से 20 प्रतिशत घट सकती है। इसके अलावा महाराष्ट्र में भी फसल में दाने पुष्ट हो गए है। वहां पर चने की फसल को अब लाभ की बजाय कुछ न कुछ बरसात से नुकसान ही होगा। अब इधर राजस्थान व हरियाणा के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी मौसम खराब होने से देशी चने की फसल को कोई व्यापक लाभ नहीं मिलेगा। इसके साथ-साथ मसूर भी नहीं बढ़ पाएगी। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए चने की फसल लेट एवं उत्पादकता बढ़ने की बात जो सोच रहे थे, वह कम हो सकती है। गौरतलब है कि देशी चने पर प्राकृतिक रूप में एक नमकीन केमिकल पैदा हो जाता है, वह बरसात न होने एवं मौसम साफ होने से फली में कीड़े पैदा नहीं होने देता है।

गौरतलब है कि चने की फसल व दाने काफी मीठे होते हैं, वह बरसात एवं बादल लगने से प्राकृतिक कैमिकल धुल जाने की स्थिति में नुकसान पहुंचा देते हैं। देशी चने की फसल को जब तक फूल नहीं लगे हैं, तब तक ही बरसात की आवश्यकता होती है। देशी चने की ऊंचाई बढ़ने पर फली कम लगती है। दूसरी ओर बिजाई भी प्रत्यक्षदर्शी कम बता रहे हैं। इन सारी परिस्थितियों को देखते हुए 4550 रुपए का लारेंस रोड पर खड़ी मोटर के चने में कोई जोखिम नहीं है तथा डिब्बे में भी 4400 का चना लाभ दे जाएगा। अभी नई फसल आने में कम से कम दो माह लगेंगे।

शकर में तेजी के संयोग कम

नई दिल्ली|
उत्पादन कमजोर होने तथा घटे भाव पर बिकवाली घटने से एक माह के दौरान शकर मिल डिलीवरी के भाव 100 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ गए। भविष्य में और ज्यादा तेजी की संभावना नहीं है। चालू सीजन के दौरान दिसम्बर अंत तक शकर का उत्पादन 77.95 लाख टन के लगभग का हुआ, जबकि गत वर्ष इसका उत्पादन 111.72 लाख टन था। इस्मा के अनुसार उत्पादन में आई गिरावट का मुख्य कारण महाराष्ट्र व कर्नाटक में गन्ना पिराई में एक माह के विलम्ब के कारण हुआ। हालांकि यूपी में दिसम्बर अंत तक शकर का उत्पादन 33.16 लाख टन के लगभग हो गया है, जो गत वर्ष की तुलना में अधिक है। यूपी की मिलों में शकर की बिकवाली 10.71 प्रतिशत की रही। निचले स्तर पर यूपी के मिलों द्वारा बिकवाली कम कर दिये जाने से मिल डिलीवरी शकर के भाव 100 रुपये बढ़कर 3315 से 3450 रुपए प्रति क्विंटल हो गए। मुम्बई में भी शकर के भाव 50 से 75 रुपए बढ़कर नाका मिल डिलीवरी के भाव 3230 से 3500 रुपए तथा हाजिर में इसके भाव 3276 से 3592 रुपए क्विंटल हो गए।



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source https://www.bhaskar.com/mp/sagar/news/mp-news-the-threat-of-damage-to-native-gram-in-mp-due-to-rain-070025-6404760.html

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