कॉलोनी स्थित श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में बुधवार को जैन पद्धति से जिले का पहला चक्रवर्ती विवाह कराया गया। इसमें गंजबसौदा की अनुजा जैन का छतरपुर के सुदीप जैन से विवाह हुआ। संस्कार में सुदीप धोती-दुपट्टा और अनुजा हैंडलूम पर बनी साड़ी पहनकर शामिल हुई। दोनों दिनभर बिना अन्न और पानी पीए व्रत धारण किए रहे। सबसे पहले भक्तांबर मंडल विधान का पूजन किया। भगवान महावीर को साक्षी मानकर यज्ञ में आहुति अर्पित की। आठ दिन तक ब्रह्मचर्य व्रत के पालन का संकल्प लिया। जीवन भर घरेलू हिंसा और व्यसन मुक्ति की शपथ ली। अगले सात दिन तक दोनों सिद्ध तीर्थ क्षेत्रों की वंदना करेंगे। वहां से लौटकर गुरु से आशीर्वाद लेकर गृहस्थ जीवन में प्रवेश करेंगे। संस्कार के तहत सूरज ढलने से पहले भोजन कराया गया।
पंडित सुरेंद्र जैन भारती ने बताया सुबह 11 बजे से शुरू हुए विवाह के सभी संस्कार पंडित सुरेंद्र जैन भारती के नेतृत्व में कराए गए। विवाह संस्कार के दौरान सभी बरातियों ने सिद्ध मंत्रों का उच्चारण किया। सामूहिक मंत्र उच्चारण से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। संस्कार में संतोष कुमार जैन, शकुन जैन, संजीव कुमार जैन, लता जैन और शांतिलाल जैन सहित अन्य समाजजन शामिल हुए। सभी ने बताया यह पद्धति नवदंपती के बंधन को अंतिम पड़ाव तक सुख-समृद्धि और संयमित बनाने का एक संस्कार है।
जैन संप्रदाय के शाही परिवारों में होता था इस पद्धति से विवाह
शांतिलाल जैन सहित अन्य समाजजन ने बताया पहले जैन संप्रदाय के शाही परिवारों में इस पद्धति से विवाह होते रहे हैं। हाल में इस पद्धति से राजस्थान में सबसे ज्यादा संस्कार हो रहे हैं। मुनि श्रेष्ठ श्री सुधासागरजी महाराज से प्रेरित होकर यहां हजारों संस्कार हुए। उन्हीं से प्रेरित होकर बुरहानपुर में पहला चक्रवर्ती विवाह संस्कार कराया गया। समाजजन ने कहा लग्न मंडप में वर-वधु के सिर्फ सात फेरे ही मायने नहीं रखते। जिस तरह ऋणि-मुनि तप और तपस्या कर समाज को उन्नत बनाते हैं, उसी तरह सफल परिवार के लिए दंपती के लिए भी तप-तपस्या जरूरी है। इससे घरेलू हिंसा, व्यसन और काम-वासना पर नियंत्रण होता है। यह आने वाली पीढ़ियों को संयमित बनाकर उन्नति के पथ पर ले जाता है।
श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में चक्रवर्ती पद्धति से विवाह कराया।
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source https://www.bhaskar.com/mp/burhanpur/news/mp-news-7-days-to-enter-the-household-life-after-worshiping-pilgrimages-070514-6459208.html
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