Wednesday, January 1, 2020

लोकल पार्ट्स, 10 एचपी की मोटर वाली जुगाड़ू मटेरियल से बनी लिफ्ट कैसे उठाती सात लाेगों का बोझ, पलट गई

इंदौर/महू. उद्योगपति पुनीत अग्रवाल के पातालपानी स्थित फॉर्म हाउस पर हुए हादसे की एफएसएल जांच में गंभीर चूक सामने आई है। जिस लिफ्ट के पलटने से अग्रवाल परिवार के 6 सदस्यों की मौत हुई, वह किसी कंपनी की न होकर जुगाड़ के सामानों को लाकर हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म पर तैयार करवाई गई थी।


एफएसएल एक्सपर्ट डॉ. बीएल मंडलोई की टीम ने 80 फीट ऊंचे टावर की लिफ्ट की जांच की तो पता चला इसे मटेरियल ढोने के लिए कुछ महीने पहले ही लगाया था। लिफ्ट लोहे के दो चैनलों पर हाइड्रोलिक प्रेशर से चलती थी। इसका एक रिमोर्ट सिस्टम था, जो इलेक्ट्रिक पैनल से जुड़ा था। लिफ्ट टावर के ऊपरी हिस्से पर ही चैनल की वेल्डिंग टूटने से 90 डिग्री पर पलट गई। उसके आसपास डेढ़ से दो फीट की छोटी रैलिंग थी, यदि ये रैलिंग बड़ी होती तो सभी लोग अटक जाते। तब इनकी जान बच सकती थी। जांच में यह भी पता चला कि लिफ्ट में हाइड्रोलिक कम्प्रेशर 10 से 15 हॉर्स पॉवर की मोटर से संचालित होता था। संभवत: कम्प्रेशर का प्रेशर अप-डाउन होने से यह अटकी और रैलिंग से जुड़ी प्लेट खुल गई।


कट-कट आवाज आई और गिर गए: निधि
चोइथराम अस्पताल में भर्ती निधि को पति गौरव व बेटे आर्यवीर की मौत की सूचना नहीं दी है। दिल्ली से डॉक्टरों की टीम को बुलाया गया है। हादसे के बाद से ही वह सदमे में है। उन्हें ज्यादा कुछ याद भी नहीं। वह यही कहती रहीं कि आई डोंट रिमेंबर, क्या हुआ। हम सब ऊपर थे। तभी कट-कट की आवाज आई और हम सब नीचे गिर गए।

बेटे नव को खो चुकी साक्षी अस्पताल में भर्ती हैं, डिलीवरी होने वाली है

पुनीत के बेटे निपुण की पत्नी साक्षी गर्भवती हैं। एक-दो दिन में ही उनकी डिलीवरी होने वाली है। हादसे में उनके तीन साल के बेटे नव की भी जान चली गई। अभी वे अस्पताल में भर्ती हैं।

निपुन का आज जन्मदिन
हादसे में जान गंवाने वाले पुनीत अग्रवाल के बेटे निपुन का गुरुवार काे जन्मदिन है। इससे एक दिन पहले बुधवार काे उन्होंने अपने पिता और चार साल के बेटे नव का अंतिम संस्कार किया।

प्रत्यक्षदर्शी: सब गिर गए, ऊपर जाओ: कर्मचारी
5 बजे सबके आने के एक घंटे बाद अचानक सर की गाड़ी नीचे आई। निपुण गाड़ी चला रहे थे, पास में बैठी मां बोलीं- सब ऊपर से गिर गए। कार में देखा तो उनके साथ सर (पुनीत)और पोता खून से सने लेटे थे। ऊपर पहुंचे तो भाभी रो रहीं थीं, बोलीं-जल्दी सबको गाड़ियों में ले चलो।


एक साथ निकली पलकेश और पलक की अंतिम यात्रा
पलकेश अग्रवाल और उनकी पत्नी की मौत के बाद बुधवार को अपोलो डीबी सिटी के एक बड़े हिस्से में सन्नाटा रहा। पूरी कॉलोनी इनके घर के बाहर एकत्र थी। हर आंख नम थी। गला रुंधा और दिल व दिमाग में एक ही सवाल- ऐसा कैसे हो गया? घर के बाहर रखे पलकेश और पलक के शव और भीतर कभी इस गोद में तो कभी उस गोद में लाड़, दुलार और फिक्र के भाव के साथ घूमती छह महीने की बेटी पहर।

पलकेश के परिजन का बुरा हाल
सबसे बुरा हाल था पलकेश के 80 वर्षीय दादाजी फूलचंद अग्रवाल का। वे हर किसी से बार-बार केवल यही बोलते- मेरे गोलू (पलकेश) को वापस लाओ। गोलू कहां है? रिश्तेदार दिलासा देने के लिए परपोती पहर को उनकी गोद में देकर बोले- बाबूजी, अब यही है गोलू। परपोती को गोद में लेकर फूलचंद फूट-फूटकर रोने लगते। इधर, गुमसुम सी पहर लोगों के भाव पढ़ने में लगी थी। लोग उसे सीने से लगाकर रो रहे थे। अमूमन बच्चे दूसरों को रोता देख खुद भी रोने लगते हैं, पर पहर चुप थी।


पति, बेटी और दामाद को सामने गिरते देखा, अब न आंसू निकल रहे न आवाज
महू में घर से पति पुनीत अग्रवाल को अंतिम विदाई देकर बेटी और दामाद को विदा करने आईं नीति अग्रवाल बिलकुल स्तब्ध थीं। न उनके आंसू निकल रहे थे और न आवाज। परिवार, रिश्तेदार, दोस्त, पडोसी बिलख रहे थे, लेकिन वे एकटक बेटी, दामाद के शव को देखती रहीं।


सदमा : लोग गिरते रहे और चीखें आती रहीं

पलकेश के ताऊजी आत्माराम अग्रवालने बताया किहम न्यू ईयर की तैयारियां इंदौर में कर रहे थे, जबकि पलकेश और बहू पलक पातालपानी फार्म हाउस गए थे। अचानक सूचना आई कि वहां लिफ्ट गिर गई है। हम तीनों भाई और परिवार के लोगों ने एक-दूसरे से संपर्क किया। फिर खबर आई कि पुनीतजी का निधन हो गया। बेटे, बहू को इलाज के लिए इंदौर ला रहे हैं। जिस जगह घटना हुई, वह अग्रवालजी (पुनीत अग्रवाल) का फार्म हाउस था। इसका काम अभी चल ही रहा है। पातालपानी को ऊंचाई से देखने के लिए 100 फीट ऊंचा टावर बनाया था। इस पर जो लिफ्ट लगी है, वह मटेरियल लाने-ले जाने के काम आती थी। इस पर परिवार के सात लोग सवार हुए। लोड ज्यादा होने से निपुण टावर पर ऊपर ही रह गए। लिफ्ट थोड़ी दूर आई और इसके बाद पतरा खुलने से हादसा हो गया।

ओवरलोड हो गई लिफ्ट, इसलिए निपुण नहीं चढ़े
परिवार के लोगों ने बताया कि लिफ्ट में टावर से नीचे आते वक्त निपुण भी सवार होने वाला था, लेकिन उसे लगा कि ज्यादा लोग हो गए हैं, तो वह रुक गया। उसने पुनीत को बोला कि पापा आप लोग पहले चले जाओ, मैं बाद में आता हूं। इसके बाद लिफ्ट कुछ ही नीचे आई और हादसा हो गया। उधर, फॉर्म हाउस के कर्मचारी का कहना है कि- सर (पुनीत अग्रवाल) जब महू में रहते थे, तब सुबह साइकिल से फॉर्म हाउस में आते थे। थोड़ा आगे टेनिस कोर्ट बना रखा है, वहां टेनिस खेलते थे। लिफ्ट अभी 20-25 दिन पहले ही लगी है। इसमें सामान चढ़ाने-उतारने का काम होता था। टावर में सीढ़ी भी बन रही है। घटना के बाद निपुण सर उसी से नीचे उतरे होंगे।



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इसी कैप्सूल से नीचे उतर रहा था अग्रवाल परिवार।


source https://www.bhaskar.com/mp/indore/news/how-the-lift-made-of-local-parts-jugadoo-material-with-10-hp-motor-lifts-the-burden-of-seven-people-overturned-126411263.html

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