किसानों का कहना है कि किसान महंगी खाद, बीज तथा रात दिन मेहनत के बाद जुताई व पलेवा के बाद अंकुरण हुआ तो शहर सहित गांव-गांव में घूमने वाले आवारा पशुओं के द्वारा उनके खेतों को निशाना बनाया जा रहा है। यह मवेशी फसलों को बर्बाद करने में जुट गए है। क्षेत्र में करीब पंद्रह साल पहले बनाई गई गोशाला में आवारा मवेशियों को बंद करवा दिया जाता था लेकिन अब वहां भी जगह नहीं होने से प्रशासन भी ऐसा नहीं कर पा रहा है। नगर पालिका का कांजी हाउस भी इसीलिए संचालित नहीं हो पा रहा है कि आवारा मवेशियों को बंद करने के बाद जब कोई उन्हें लेने नहीं आता तो नीलामी में भी कोई नहीं खरीदता है। यदि गोशाला भेजो तो वहां पर स्थान नहीं होने के कारण वापस कर दिया जाता है। जिसके चलते शहर के आसपास खेती करने वाले किसान सबसे ज्यादा परेशान है, वे पशुओं को हांककर दूर तक छोड़ आते है तो वहां के किसान उन्हें वापस छोड़ जाते है। वहीं शहर से लगे गांव के लोग ऐसे आवारा मवेशियों को शहर की तरफ छोड़कर चले जाते है। किसान धर्मेंद्र सिंह का कहना है कि आवारा मवेशी किसी वाहन से टकरा जाए तो हिंदूवादी संगठन हंगामा करने जरूर आ जाते है लेकिन इन्हें पालने के लिए कोई तैयार नहीं है। हरिओम शर्मा का कहना है कि सरकार अपने वादे के मुताबिक जल्द ही पंचायत स्तर पर गोशालाएं बनवाए।
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source https://www.bhaskar.com/mp/raisen/news/mp-news-cattle-wereting-crops-farmers-upset-074014-6133288.html
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