प्रणय चौहान | इंदौर .18 साल का कार्तिक जोशी। परिवार चलाने के लिए पिता के साथ चाय की दुकान संभालता है। गरीबी इतनी कि 10 बाय 10 की चाय की दुकान से दिनभर परिवार के लिए पैसे जुटाना और रात होते ही मां, भाई, बहन, पिता के साथ दुकान में ही सोना, क्योंकि आमदनी इतनी नहीं कि किराए का कोई मकान ले सके। साढ़े 15 साल की उम्र में दुकान के पास ही पुलिस ट्रेनिंग ग्राउंड में जवानों को दौड़ते देख कार्तिक ने ठान लिया कि एक दिन दौड़ में नाम कमाएगा। और 3 साल में कार्तिक अब 50 से ज्यादा रेस जीत चुका है। गर्मी में बिना रुके और बिना सोए 41 घंटे में 250 किमी दौड़कर वह प्रदेश का सबसे कम उम्र का अल्ट्रा मैराथन विजेता भी बन गया है।
कार्तिक ने बताया कि दौड़ने से पहले दूध या उससे बनी सामग्री नहीं खाना चाहिए, क्योंकि इसे पचाने में 5 से 7 घंटे लग जाते हैं। चना और अंडा खाकर भी नहीं दौड़ना चाहिए। ये बहुत भारी होते हैं। ज्यादा केले भी नहीं खाना चाहिए। दौड़ के दो घंटे पहले ब्लैक कॉफी बगैर दूध-शक्कर के, आधा केला खाएं। बासी चपाती खाना चाहिए, क्योंकि इसमें कार्बोहाड्रेट ज्यादा मात्रा में होता है और साथ ही खजूर खाना चाहिए।
इतनी मेहनत... हर महीने हजार किमी दौड़ने की प्रैक्टिस
रामबली नगर में रहने वाले 11वीं के छात्र कार्तिक ने बताया- ‘मैं ट्रेनर को फीस नहीं दे सकता, इसलिए ऑनलाइन रनिंग स्टडी करता हूं। रोजाना रनिंग से जुड़े एक टॉपिक की स्टडी करता हूं। हर महीने सुबह, दोपहर और रात को प्रैक्टिस के दाैरान हजार किमी तक दौड़ लेता हूं। गर्मी की प्रतियोगिताओं के लिए चोरल के जंगलों और जानापाव की पहाड़ियों में प्रैक्टिस करता हूं। ठंडी जगहों पर होने वाली प्रतियोगिता के लिए रात 2 बजे मल्हार आश्रम में दौड़ने जाता हूं।’ पिता ओमप्रकाश जोशी ने बताया कार्तिक हर महीने 1500 से 2 हजार किमी साइकिल 32 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलाता है। पाथ इंडिया कंपनी के नितिन अग्रवाल व पुनीत अग्रवाल मैराथन के रजिस्ट्रेशन की फीस, जूते, प्रतियोगिता में आने-जाने, ठहरने, खाने का खर्च उठाते हैं।
चुनिंदा प्रतियोगिताएं, जिनमें मेडल जीत चुका कार्तिक
- बेंगलुरू में हैनुर बेम्बू अल्ट्रा मैराथन (250 किमी) जीतते ही प्रदेश का एकमात्र सबसे युवा अल्ट्रा मैराथन रनर बना। 41 घंटे में जीती रेस। बेंगलुरू में हैनुर बेम्बू अल्ट्रा रेस (220 किमी जंगल में दौड़ना) 46 घंटे में पूरी की।
- सोलांग सकाय अल्ट्रा में जंगल, पहाड़ों, नदी, बर्फ और बारिश के बीच 100 किमी रेस। 30 घंटे में पूरी की।
- वर्चुअल चैलेंज में जीपीएस घड़ी से दौड़ को ट्रैक किया जाता है। 30 दिन की प्रतियोगिता होती है। 24 दिन में 1645 किमी दौड़ लगाई।
- स्वच्छता का संदेश देने के लिए इंदौर से भोपाल 206 किमी और स्वच्छता के लिए शहर के 69 वार्ड में एक वार्ड से दूसरे वार्ड में 651 किमी की दौड़।
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source https://www.bhaskar.com/mp/indore/news/sells-tea-with-father-determined-to-see-the-jawans-running-in-the-ground-will-earn-the-name-and-in-3-years-kartik-18-won-more-than-50-races-126355371.html
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